विराट पर्व · अध्याय 23
उत्तर और बृहन्नला
अब तक की कहानी
भीम ने कीचक को मार डाला। दुर्योधन को शक है कि पांडव मत्स्य देश में छिपे हैं, जबकि अज्ञातवास के आख़िरी दिन चल रहे हैं।
दुर्योधन ने एक योजना बनाई। पहले त्रिगर्त के राजा सुशर्मा ने दक्षिण से मत्स्य की गायें घेर लीं। राजा विराट अपनी सेना लेकर उधर गए, साथ में कंक, बल्लव, नकुल और सहदेव भी गए। तभी उत्तर दिशा से भीष्म, द्रोण, कर्ण और दुर्योधन की विशाल कौरव सेना ने गायों पर धावा बोल दिया। नगर में केवल राजकुमार उत्तर बचे थे।
उत्तर ने महिलाओं के बीच बड़ी डींग मारी, 'काश मेरे पास कोई सारथी होता, मैं अकेले कौरवों को हरा देता!' सैरंध्री ने कहा, 'बृहन्नला अच्छी सारथी है, उसने अर्जुन का रथ चलाया था।' उत्तर बृहन्नला को सारथी बनाकर निकल पड़े। पर कौरवों की विशाल सेना देखते ही उनके होश उड़ गए। वे रथ से कूदकर भागने लगे।
बृहन्नला ने दौड़कर उन्हें पकड़ लिया और कहा, 'डरो मत। तुम रथ चलाओ, मैं लड़ूँगा।' वे रथ को शमी के पेड़ के पास ले गए और शस्त्र उतरवाए। गांडीव देखकर उत्तर चकित रह गया। तब बृहन्नला ने बताया, 'मैं अर्जुन हूँ। कंक युधिष्ठिर हैं, बल्लव भीम हैं, और सैरंध्री द्रौपदी हैं।' उत्तर का डर हिम्मत में बदल गया।
अर्जुन ने शंख बजाया और कौरव सेना पर टूट पड़े। उन्होंने कर्ण को हराया, द्रोण और कृपाचार्य को पीछे हटाया, और भीष्म से भी जमकर लड़े। अंत में उन्होंने अस्त्र चलाया, जिससे पूरी कौरव सेना बेहोश हो गई। उत्तर ने राजकुमारी उत्तरा की गुड़ियों के लिए योद्धाओं के रंगीन वस्त्र उतार लिए। भीष्म को अर्जुन ने छुआ तक नहीं, सम्मान से प्रणाम किया।
जब दुर्योधन ने कहा कि अर्जुन अज्ञातवास में पहचाने गए हैं, तो भीष्म ने गणना करके बताया कि तेरह वर्ष उसी दिन पूरे हो चुके थे। पांडवों ने वचन निभाया था। राजा विराट को जब सच पता चला, तो वे पांडवों के चरणों में गिर पड़े। उन्होंने अपनी बेटी उत्तरा का विवाह अर्जुन से करना चाहा। अर्जुन बोले, 'मैंने उसे शिष्या की तरह पढ़ाया है, वह मेरी बेटी समान है।' इसलिए उत्तरा का विवाह अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु से हुआ।
आज के जीवन में सीख
बड़ी-बड़ी बातें करना आसान है, पर हिम्मत मुश्किल के सामने दिखती है। अच्छा मार्गदर्शक डरे हुए को भी योद्धा बना देता है।
सभी अध्याय
- 1राजा शांतनु और गंगा
- 2भीष्म प्रतिज्ञा
- 3सत्यवती और महर्षि व्यास
- 4अंबा की कथा
- 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
- 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
- 7पांडवों और कौरवों का जन्म
- 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
- 9एकलव्य की गुरुभक्ति
- 10रंगभूमि में कर्ण
- 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
- 12भीम और हिडिंबा
- 13द्रौपदी स्वयंवर
- 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
- 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
- 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
- 17द्रौपदी की लाज
- 18वनवास की शुरुआत
- 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
- 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
- 21यक्ष प्रश्न
- 22अज्ञातवास और कीचक
- 23उत्तर और बृहन्नला
- 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
- 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
- 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
- 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
- 28विश्वरूप दर्शन
- 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
- 30बाणों की शय्या पर भीष्म
- 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
- 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
- 33घटोत्कच का बलिदान
- 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
- 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
- 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
- 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
- 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
- 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
- 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
- 41गांधारी का शोक और शाप
- 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
- 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
- 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
- 45परीक्षित का जन्म
- 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
- 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
- 48बड़ों का वन-गमन
- 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
- 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
- 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
- 52स्वर्ग में युधिष्ठिर