कर्ण पर्व · अध्याय 36
कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
अब तक की कहानी
भीम ने दुःशासन को मारकर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। सत्रहवें दिन आख़िरकार कर्ण और अर्जुन आमने-सामने आए।
देवता आकाश से देख रहे थे। दोनों महान धनुर्धर थे और — जो केवल कुछ ही लोग जानते थे — दोनों कुंती के पुत्र, सगे भाई थे। बाणों की ऐसी वर्षा हुई कि सूर्य छिप गया। कभी अर्जुन भारी पड़ते, कभी कर्ण।
कर्ण ने एक नाग-बाण चलाया, जिसमें अर्जुन का पुराना शत्रु नाग बैठा था। बाण अर्जुन के गले की ओर जा रहा था। ठीक उसी पल श्रीकृष्ण ने रथ को पैरों से दबाकर धरती में कुछ नीचे धँसा दिया। बाण अर्जुन का मुकुट उड़ा ले गया, पर प्राण बच गए।
तभी कर्ण के रथ का पहिया धरती में धँस गया — एक ब्राह्मण का पुराना शाप फलित हुआ था। गुरु परशुराम के शाप से, सबसे ज़रूरी समय पर कर्ण को का मंत्र भी याद नहीं आया। कर्ण रथ से उतरे और पहिया निकालते हुए बोले, 'अर्जुन, रुको! निहत्थे पर वार करना धर्म नहीं है।'
श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया, 'कर्ण, अब तुम्हें धर्म याद आया? जब द्रौपदी को सभा में घसीटा गया, जब लाक्षागृह में आग लगाई गई, जब छह महारथियों ने मिलकर बालक अभिमन्यु को मारा — तब तुम्हारा धर्म कहाँ था?' कर्ण चुप हो गए और सिर झुका लिया।
श्रीकृष्ण के कहने पर अर्जुन ने बाण चलाया और कर्ण का अंत हुआ। कहा जाता है कि उनके शरीर से एक तेज निकलकर सूर्य में समा गया। दानवीर, वीर और दुखी कर्ण — जिन्हें जीवन भर अपना असली परिचय नहीं मिला — युद्धभूमि में सदा के लिए सो गए।
आज के जीवन में सीख
अच्छे गुण होने के बावजूद ग़लत संगत और ग़लत चुप्पी इंसान को डुबो सकती है। सही समय पर सही पक्ष चुनना ज़रूरी है।
सभी अध्याय
- 1राजा शांतनु और गंगा
- 2भीष्म प्रतिज्ञा
- 3सत्यवती और महर्षि व्यास
- 4अंबा की कथा
- 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
- 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
- 7पांडवों और कौरवों का जन्म
- 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
- 9एकलव्य की गुरुभक्ति
- 10रंगभूमि में कर्ण
- 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
- 12भीम और हिडिंबा
- 13द्रौपदी स्वयंवर
- 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
- 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
- 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
- 17द्रौपदी की लाज
- 18वनवास की शुरुआत
- 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
- 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
- 21यक्ष प्रश्न
- 22अज्ञातवास और कीचक
- 23उत्तर और बृहन्नला
- 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
- 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
- 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
- 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
- 28विश्वरूप दर्शन
- 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
- 30बाणों की शय्या पर भीष्म
- 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
- 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
- 33घटोत्कच का बलिदान
- 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
- 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
- 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
- 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
- 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
- 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
- 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
- 41गांधारी का शोक और शाप
- 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
- 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
- 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
- 45परीक्षित का जन्म
- 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
- 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
- 48बड़ों का वन-गमन
- 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
- 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
- 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
- 52स्वर्ग में युधिष्ठिर