द्रोण पर्व · अध्याय 32
अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
अब तक की कहानी
चक्रव्यूह में अभिमन्यु अकेले घिरकर मारे गए। जयद्रथ ने पांडवों को उनकी सहायता के लिए अंदर जाने से रोका था।
शोक में डूबे अर्जुन ने सारी बात सुनी और उठ खड़े हुए। उन्होंने भीषण प्रतिज्ञा की — 'कल सूर्यास्त से पहले मैं जयद्रथ का वध करूँगा। यदि न कर सका, तो स्वयं अग्नि में प्रवेश कर लूँगा।' उन्होंने गांडीव की टंकार की और श्रीकृष्ण ने शंख बजाया।
यह सुनकर जयद्रथ डर गया और भागना चाहता था। दुर्योधन और द्रोण ने उसे भरोसा दिलाया। अगले दिन द्रोण ने ऐसा व्यूह रचा कि जयद्रथ सबसे पीछे, लाखों सैनिकों और बड़े-बड़े योद्धाओं के घेरे में छिपा रहे।
चौदहवें दिन अर्जुन ने व्यूह को चीरना शुरू किया। घोड़े थक गए, प्यासे हो गए — तब अर्जुन ने बाणों से धरती में सरोवर बना दिया और बाणों का घर बनाकर उनकी रक्षा की, जबकि श्रीकृष्ण ने युद्धभूमि के बीच घोड़ों को पानी पिलाया। फिर भी दिन ढलने लगा और जयद्रथ अब भी दूर था।
प्रचलित कथा के अनुसार, तब श्रीकृष्ण ने अपनी माया से सूर्य को ढक दिया। लगा कि सूर्य डूब गया। कौरव ख़ुशी से चिल्लाने लगे और जयद्रथ भी अर्जुन को अग्नि में जाते देखने के लिए सामने आ गया।
श्रीकृष्ण बोले, 'अर्जुन, सूर्य अभी डूबा नहीं — वह देखो जयद्रथ!' अर्जुन के बाण ने जयद्रथ का सिर काट दिया। कृष्ण के कहने पर अर्जुन ने बाणों से वह सिर दूर उसके पिता की गोद में पहुँचा दिया, क्योंकि उन्हें वरदान था कि जो जयद्रथ का सिर धरती पर गिराएगा, उसके सिर के टुकड़े हो जाएँगे।
आज के जीवन में सीख
बड़े वादे ग़ुस्से में आसान हैं, निभाना कठिन। जब वादा करें, तो उसके लिए पूरी जान लगा दें — और सही सलाह को सुनें।
सभी अध्याय
- 1राजा शांतनु और गंगा
- 2भीष्म प्रतिज्ञा
- 3सत्यवती और महर्षि व्यास
- 4अंबा की कथा
- 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
- 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
- 7पांडवों और कौरवों का जन्म
- 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
- 9एकलव्य की गुरुभक्ति
- 10रंगभूमि में कर्ण
- 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
- 12भीम और हिडिंबा
- 13द्रौपदी स्वयंवर
- 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
- 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
- 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
- 17द्रौपदी की लाज
- 18वनवास की शुरुआत
- 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
- 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
- 21यक्ष प्रश्न
- 22अज्ञातवास और कीचक
- 23उत्तर और बृहन्नला
- 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
- 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
- 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
- 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
- 28विश्वरूप दर्शन
- 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
- 30बाणों की शय्या पर भीष्म
- 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
- 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
- 33घटोत्कच का बलिदान
- 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
- 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
- 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
- 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
- 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
- 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
- 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
- 41गांधारी का शोक और शाप
- 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
- 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
- 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
- 45परीक्षित का जन्म
- 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
- 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
- 48बड़ों का वन-गमन
- 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
- 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
- 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
- 52स्वर्ग में युधिष्ठिर