विराट पर्व · अध्याय 22

अज्ञातवास और कीचक

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

बारह वर्ष का वनवास पूरा हुआ। अब पांडवों को एक वर्ष ऐसे बिताना है कि कोई उन्हें पहचान न सके।

पांडवों ने अज्ञातवास के लिए मत्स्य देश चुना, जहाँ राजा विराट राज करते थे। नगर के पास श्मशान में एक का पेड़ था। उन्होंने अपने सारे शस्त्र कपड़े में लपेटकर उस पेड़ पर ऐसे बाँध दिए, जैसे कोई शव हो, ताकि कोई उन्हें छूने की हिम्मत न करे। फिर सबने नए नाम और नए काम चुने।

युधिष्ठिर 'कंक' बने — राजा के साथ पासे खेलने वाले सभासद। भीम 'बल्लव' नाम से रसोइया बने। अर्जुन, उर्वशी के शाप के कारण एक वर्ष के लिए बनकर राजकुमारी उत्तरा को नृत्य-संगीत सिखाने लगे। नकुल घोड़ों के और सहदेव गायों के रखवाले बने। द्रौपदी 'सैरंध्री' नाम से रानी सुदेष्णा की सेविका बनीं।

रानी सुदेष्णा का भाई कीचक मत्स्य का सेनापति था — बलवान और घमंडी। उसकी बुरी नज़र सैरंध्री पर पड़ी। द्रौपदी ने उसे बार-बार ठुकराया, पर वह नहीं माना। एक दिन उसने भरी सभा में द्रौपदी को लात मार दी। कंक बने युधिष्ठिर और बल्लव बने भीम सब देख रहे थे, पर पहचान खुल जाने के डर से चुप रहे।

उस रात द्रौपदी रसोई में भीम के पास गईं और रोते हुए बोलीं, 'कब तक यह अपमान सहूँगी?' भीम ने कहा, 'अब और नहीं।' योजना बनी — द्रौपदी कीचक से कहेंगी कि रात को नृत्यशाला में मिले। रात को कीचक वहाँ पहुँचा। अँधेरे में द्रौपदी की जगह भीम लेटे थे। दोनों में भयंकर कुश्ती हुई और भीम ने कीचक को मार डाला।

कीचक के भाइयों ने सैरंध्री को दोषी मानकर उसे कीचक की चिता पर जलाने के लिए बाँध लिया। द्रौपदी ने गुप्त नामों से पुकारा। भीम एक पेड़ उखाड़कर दौड़े और सारे भाइयों को मार गिराया। नगर में चर्चा फैल गई कि सैरंध्री के गंधर्व पति उसकी रक्षा करते हैं। उधर दुर्योधन ने सुना कि कीचक मारा गया, तो उसे शक हुआ — ऐसी ताक़त तो केवल भीम में है।

आज के जीवन में सीख

कभी-कभी सही समय का इंतज़ार करना कमज़ोरी नहीं, समझदारी होती है। पर किसी की इज़्ज़त पर हाथ उठे, तो चुप रहना धर्म नहीं।

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सभी अध्याय

  1. 1राजा शांतनु और गंगा
  2. 2भीष्म प्रतिज्ञा
  3. 3सत्यवती और महर्षि व्यास
  4. 4अंबा की कथा
  5. 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
  6. 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
  7. 7पांडवों और कौरवों का जन्म
  8. 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
  9. 9एकलव्य की गुरुभक्ति
  10. 10रंगभूमि में कर्ण
  11. 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
  12. 12भीम और हिडिंबा
  13. 13द्रौपदी स्वयंवर
  14. 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
  15. 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
  16. 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
  17. 17द्रौपदी की लाज
  18. 18वनवास की शुरुआत
  19. 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
  20. 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
  21. 21यक्ष प्रश्न
  22. 22अज्ञातवास और कीचक
  23. 23उत्तर और बृहन्नला
  24. 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
  25. 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
  26. 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
  27. 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
  28. 28विश्वरूप दर्शन
  29. 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
  30. 30बाणों की शय्या पर भीष्म
  31. 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
  32. 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
  33. 33घटोत्कच का बलिदान
  34. 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
  35. 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
  36. 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
  37. 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
  38. 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
  39. 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
  40. 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
  41. 41गांधारी का शोक और शाप
  42. 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
  43. 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
  44. 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
  45. 45परीक्षित का जन्म
  46. 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
  47. 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
  48. 48बड़ों का वन-गमन
  49. 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
  50. 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
  51. 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
  52. 52स्वर्ग में युधिष्ठिर

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