भीष्म पर्व · अध्याय 27

कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

शांति के सारे प्रयास विफल हो चुके हैं। कुरुक्षेत्र में पांडवों और कौरवों की सेनाएँ आमने-सामने खड़ी हैं। श्रीकृष्ण अर्जुन के सारथी हैं।

शंख बज चुके थे। अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा, 'मेरे रथ को दोनों सेनाओं के बीच ले चलिए, मैं देखना चाहता हूँ कि मुझे किन-किन से लड़ना है।' श्रीकृष्ण ने रथ भीष्म और द्रोणाचार्य के ठीक सामने रोक दिया।

अर्जुन ने देखा — सामने उनके दादा भीष्म थे, गुरु द्रोणाचार्य थे, चचेरे भाई, मामा, मित्र और उनके बेटे थे। उनके हाथ काँपने लगे, मुँह सूख गया और धनुष हाथ से फिसल गया।

अर्जुन रथ में बैठ गए और बोले, 'केशव, अपनों को मारकर मिला राज्य किस काम का? मैं युद्ध नहीं करूँगा।' उनकी आँखें आँसुओं से भरी थीं।

श्रीकृष्ण मुस्कुराए। उन्होंने अर्जुन को डाँटा नहीं, उनका फ़ैसला भी नहीं सुनाया। उन्होंने पहले अर्जुन के मन की उलझन को समझा, और फिर वह संवाद शुरू हुआ जिसे आज हम भगवद गीता कहते हैं।

क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते। क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप॥

हे पार्थ, कायरता को मत अपनाओ, यह तुम्हें शोभा नहीं देती। हृदय की इस छोटी-सी दुर्बलता को छोड़कर उठो।

— भगवद गीता 2.3

आज के जीवन में सीख

हर किसी के जीवन में ऐसा पल आता है जब हम ठिठक जाते हैं। ऐसे समय में सही मार्गदर्शक वह है जो फ़ैसला थोपे नहीं, बल्कि हमें साफ़ देखना सिखाए।

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सभी अध्याय

  1. 1राजा शांतनु और गंगा
  2. 2भीष्म प्रतिज्ञा
  3. 3सत्यवती और महर्षि व्यास
  4. 4अंबा की कथा
  5. 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
  6. 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
  7. 7पांडवों और कौरवों का जन्म
  8. 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
  9. 9एकलव्य की गुरुभक्ति
  10. 10रंगभूमि में कर्ण
  11. 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
  12. 12भीम और हिडिंबा
  13. 13द्रौपदी स्वयंवर
  14. 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
  15. 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
  16. 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
  17. 17द्रौपदी की लाज
  18. 18वनवास की शुरुआत
  19. 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
  20. 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
  21. 21यक्ष प्रश्न
  22. 22अज्ञातवास और कीचक
  23. 23उत्तर और बृहन्नला
  24. 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
  25. 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
  26. 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
  27. 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
  28. 28विश्वरूप दर्शन
  29. 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
  30. 30बाणों की शय्या पर भीष्म
  31. 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
  32. 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
  33. 33घटोत्कच का बलिदान
  34. 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
  35. 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
  36. 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
  37. 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
  38. 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
  39. 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
  40. 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
  41. 41गांधारी का शोक और शाप
  42. 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
  43. 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
  44. 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
  45. 45परीक्षित का जन्म
  46. 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
  47. 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
  48. 48बड़ों का वन-गमन
  49. 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
  50. 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
  51. 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
  52. 52स्वर्ग में युधिष्ठिर

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