शल्य पर्व · अध्याय 38
भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
अब तक की कहानी
शल्य और शकुनि मारे गए। अकेला बचा दुर्योधन द्वैपायन सरोवर के पानी में छिप गया।
कुछ शिकारियों से पता चला कि दुर्योधन कहाँ छिपा है। पांडव श्रीकृष्ण के साथ सरोवर पर पहुँचे। युधिष्ठिर ने पुकारा, 'दुर्योधन, क्षत्रिय होकर छिपे हो? बाहर आओ और लड़ो।' दुर्योधन बोला, 'मेरे सब अपने मारे गए। यह धरती अब तुम ले लो, मैं वन चला जाऊँगा।' युधिष्ठिर ने कहा, 'जो तुम्हारी नहीं रही, उसे दान में नहीं ले सकते।'
फिर युधिष्ठिर ने एक बड़ा प्रस्ताव रख दिया — 'हम पाँचों में से किसी एक से, अपनी पसंद के हथियार से लड़ो। जीत गए तो राज्य तुम्हारा।' श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को डाँटा, क्योंकि गदा में दुर्योधन के बराबर कोई नहीं था। दुर्योधन पानी से निकला और उसने गदा युद्ध के लिए भीम को चुना।
तभी तीर्थयात्रा से बलराम लौट आए — भीम और दुर्योधन दोनों के गदा-गुरु। भयानक युद्ध हुआ। दुर्योधन अधिक कुशल था और भीम अधिक बलवान। जब युद्ध लंबा खिंचा, तो श्रीकृष्ण ने अर्जुन को याद दिलाया कि भीम ने द्यूत-सभा में दुर्योधन की तोड़ने की प्रतिज्ञा की थी। अर्जुन ने अपनी जाँघ पर हाथ मारकर भीम को इशारा किया।
भीम ने गदा से दुर्योधन की जंघाएँ तोड़ दीं और वह धरती पर गिर पड़ा। गदा युद्ध में नाभि के नीचे वार करना नियम के विरुद्ध था, इसलिए बलराम क्रोध में हल उठाकर भीम की ओर दौड़े। श्रीकृष्ण ने उन्हें रोका और भीम की प्रतिज्ञा व दुर्योधन के पापों की याद दिलाई। बलराम दुखी मन से द्वारका लौट गए।
गिरा हुआ दुर्योधन श्रीकृष्ण पर छल के आरोप लगाता रहा। श्रीकृष्ण ने उसे उसके कर्म गिनाए — भीम को विष देना, लाक्षागृह, द्रौपदी का अपमान, अभिमन्यु की हत्या। फिर भी दुर्योधन बोला, 'मैंने राजा की तरह जीवन जिया और वीर की तरह मर रहा हूँ।' कहते हैं उस पर आकाश से फूल बरसे। एक ओर उसकी हठ थी, दूसरी ओर उसका साहस — दोनों सच थे।
आज के जीवन में सीख
अहंकार इंसान को आख़िरी पल तक सही-ग़लत देखने नहीं देता। समय रहते झुकना हार नहीं, समझदारी है।
सभी अध्याय
- 1राजा शांतनु और गंगा
- 2भीष्म प्रतिज्ञा
- 3सत्यवती और महर्षि व्यास
- 4अंबा की कथा
- 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
- 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
- 7पांडवों और कौरवों का जन्म
- 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
- 9एकलव्य की गुरुभक्ति
- 10रंगभूमि में कर्ण
- 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
- 12भीम और हिडिंबा
- 13द्रौपदी स्वयंवर
- 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
- 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
- 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
- 17द्रौपदी की लाज
- 18वनवास की शुरुआत
- 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
- 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
- 21यक्ष प्रश्न
- 22अज्ञातवास और कीचक
- 23उत्तर और बृहन्नला
- 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
- 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
- 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
- 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
- 28विश्वरूप दर्शन
- 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
- 30बाणों की शय्या पर भीष्म
- 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
- 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
- 33घटोत्कच का बलिदान
- 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
- 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
- 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
- 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
- 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
- 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
- 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
- 41गांधारी का शोक और शाप
- 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
- 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
- 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
- 45परीक्षित का जन्म
- 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
- 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
- 48बड़ों का वन-गमन
- 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
- 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
- 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
- 52स्वर्ग में युधिष्ठिर