सौप्तिक पर्व · अध्याय 39

अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण

पढ़ने का समय 5 मिनट

इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

भीम ने दुर्योधन की जंघाएँ तोड़ दीं और पांडव जीत गए। कौरव पक्ष में केवल तीन योद्धा बचे — अश्वत्थामा, कृपाचार्य और कृतवर्मा।

तीनों योद्धा मरते हुए दुर्योधन के पास पहुँचे। पिता द्रोण की छलपूर्ण मृत्यु से जल रहे अश्वत्थामा ने कसम खाई, 'मैं आज ही पांचालों और पांडवों का नाश कर दूँगा।' दुर्योधन ने उसी अवस्था में उसे सेनापति बना दिया।

रात को तीनों एक बरगद के पेड़ के नीचे रुके। कृपाचार्य और कृतवर्मा सो गए, पर अश्वत्थामा जागता रहा। उसने देखा कि एक उल्लू ने अँधेरे में आकर पेड़ पर सोए कौओं को एक-एक कर मार डाला। उसके मन में भयंकर विचार आया — 'सोते हुए शत्रु पर हमला करूँगा।'

कृपाचार्य ने उसे बहुत रोका — 'सोते हुए पर वार करना अधर्म है।' पर अश्वत्थामा नहीं माना। पांडव शिविर के द्वार पर उसे एक विशाल, भयानक प्राणी ने रोका, जिसने उसके सारे अस्त्र निगल लिए। तब अश्वत्थामा ने भगवान शिव की आराधना की और स्वयं को अग्नि में अर्पित करने चला। प्रसन्न होकर शिव ने उसे एक तलवार दी और स्वयं उसके भीतर प्रवेश कर गए।

अश्वत्थामा शिविर में घुसा। उसने सोते हुए धृष्टद्युम्न को लात-घूँसों से मारा, ताकि उसे वीर की मृत्यु न मिले। फिर उसने द्रौपदी के पाँचों पुत्रों, शिखंडी और अनगिनत सोते हुए योद्धाओं को मार डाला। जो भागे, उन्हें द्वार पर खड़े कृपाचार्य और कृतवर्मा ने मार दिया। शिविर में आग लगा दी गई।

पांडव, श्रीकृष्ण और सात्यकि उस रात श्रीकृष्ण की सलाह पर शिविर से बाहर थे, इसलिए बच गए। सुबह होने से पहले अश्वत्थामा ने दुर्योधन को यह समाचार सुनाया। दुर्योधन ने संतोष से प्राण छोड़ दिए। जो युद्ध धर्म के नाम पर लड़ा गया था, उसका अंत एक भरी रात में हुआ।

आज के जीवन में सीख

बदले की आग इंसान को उन्हीं जैसा बना देती है जिनसे वह नफ़रत करता है। क्रोध में लिया फ़ैसला अक्सर सबसे बड़ा पाप बन जाता है।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 4 मिनटब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि

सभी अध्याय

  1. 1राजा शांतनु और गंगा
  2. 2भीष्म प्रतिज्ञा
  3. 3सत्यवती और महर्षि व्यास
  4. 4अंबा की कथा
  5. 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
  6. 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
  7. 7पांडवों और कौरवों का जन्म
  8. 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
  9. 9एकलव्य की गुरुभक्ति
  10. 10रंगभूमि में कर्ण
  11. 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
  12. 12भीम और हिडिंबा
  13. 13द्रौपदी स्वयंवर
  14. 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
  15. 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
  16. 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
  17. 17द्रौपदी की लाज
  18. 18वनवास की शुरुआत
  19. 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
  20. 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
  21. 21यक्ष प्रश्न
  22. 22अज्ञातवास और कीचक
  23. 23उत्तर और बृहन्नला
  24. 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
  25. 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
  26. 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
  27. 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
  28. 28विश्वरूप दर्शन
  29. 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
  30. 30बाणों की शय्या पर भीष्म
  31. 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
  32. 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
  33. 33घटोत्कच का बलिदान
  34. 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
  35. 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
  36. 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
  37. 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
  38. 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
  39. 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
  40. 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
  41. 41गांधारी का शोक और शाप
  42. 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
  43. 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
  44. 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
  45. 45परीक्षित का जन्म
  46. 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
  47. 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
  48. 48बड़ों का वन-गमन
  49. 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
  50. 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
  51. 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
  52. 52स्वर्ग में युधिष्ठिर

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार