द्रोण पर्व · अध्याय 31

अभिमन्यु और चक्रव्यूह

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अब तक की कहानी

भीष्म के गिरने के बाद गुरु द्रोणाचार्य कौरवों के सेनापति बने। दुर्योधन चाहता था कि किसी तरह युधिष्ठिर को बंदी बनाया जाए।

तेरहवें दिन कौरवों ने चाल चली। योद्धाओं ने अर्जुन को ललकारकर युद्धभूमि के दूर कोने में खींच लिया। उधर द्रोणाचार्य ने रचा — सैनिकों का ऐसा घेरा जो चक्र की तरह घूमता था और जिसे तोड़ना अर्जुन और श्रीकृष्ण के सिवा कोई नहीं जानता था।

पांडव चिंतित थे। तब अर्जुन के सोलह वर्ष के पुत्र अभिमन्यु आगे आए — 'मैं व्यूह में घुसना जानता हूँ, पर निकलना नहीं।' लोककथा के अनुसार उन्होंने यह विद्या माँ सुभद्रा के गर्भ में सुनी थी, जब अर्जुन सुना रहे थे, और सुनते-सुनते सुभद्रा सो गई थीं। भीम ने कहा, 'तुम रास्ता खोलो, हम पीछे-पीछे आएँगे।'

अभिमन्यु बिजली की तरह व्यूह में घुस गए। पर जैसे ही पांडव पीछे आने लगे, सिंधु के राजा जयद्रथ ने द्वार रोक लिया। शिव के वरदान से उस दिन उसने भीम, युधिष्ठिर, नकुल और सहदेव सबको रोके रखा। अभिमन्यु अंदर अकेले रह गए।

अकेले होकर भी अभिमन्यु ने अनगिनत योद्धाओं को हराया, दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण को भी मार गिराया। तब द्रोण, कर्ण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा और दूसरे महारथियों ने मिलकर उन पर एक साथ हमला किया — जो युद्ध के नियमों के विरुद्ध था। कर्ण ने पीछे से उनका धनुष काट दिया, रथ और घोड़े भी नष्ट कर दिए गए।

निहत्थे अभिमन्यु ने रथ का पहिया उठा लिया और उसी से लड़ते रहे। अंत में दुःशासन के पुत्र ने गदा से उन पर प्रहार किया और वीर बालक धरती पर गिर पड़ा। शाम को जब अर्जुन लौटे और यह समाचार सुना, तो उनका हृदय टूट गया।

आज के जीवन में सीख

आधा ज्ञान ख़तरनाक हो सकता है — कोई भी काम शुरू करने से पहले उसका अंत भी समझ लें। और साहस वह है जो हालात बिगड़ने पर भी हार न माने।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 4 मिनटअर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध

सभी अध्याय

  1. 1राजा शांतनु और गंगा
  2. 2भीष्म प्रतिज्ञा
  3. 3सत्यवती और महर्षि व्यास
  4. 4अंबा की कथा
  5. 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
  6. 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
  7. 7पांडवों और कौरवों का जन्म
  8. 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
  9. 9एकलव्य की गुरुभक्ति
  10. 10रंगभूमि में कर्ण
  11. 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
  12. 12भीम और हिडिंबा
  13. 13द्रौपदी स्वयंवर
  14. 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
  15. 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
  16. 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
  17. 17द्रौपदी की लाज
  18. 18वनवास की शुरुआत
  19. 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
  20. 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
  21. 21यक्ष प्रश्न
  22. 22अज्ञातवास और कीचक
  23. 23उत्तर और बृहन्नला
  24. 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
  25. 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
  26. 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
  27. 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
  28. 28विश्वरूप दर्शन
  29. 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
  30. 30बाणों की शय्या पर भीष्म
  31. 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
  32. 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
  33. 33घटोत्कच का बलिदान
  34. 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
  35. 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
  36. 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
  37. 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
  38. 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
  39. 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
  40. 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
  41. 41गांधारी का शोक और शाप
  42. 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
  43. 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
  44. 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
  45. 45परीक्षित का जन्म
  46. 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
  47. 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
  48. 48बड़ों का वन-गमन
  49. 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
  50. 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
  51. 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
  52. 52स्वर्ग में युधिष्ठिर

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