आश्वमेधिक पर्व · अध्याय 46
अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
अब तक की कहानी
श्रीकृष्ण ने मृत जन्मे परीक्षित को जीवन दिया। अब युधिष्ठिर का अश्वमेध यज्ञ आरंभ हुआ।
यज्ञ में एक घोड़े को खुला छोड़ा जाता है। वह जिन राज्यों से गुज़रता है, वे राजा या तो उसकी अधीनता मानते हैं या युद्ध करते हैं। घोड़े की रक्षा का भार अर्जुन को मिला। पूरे एक वर्ष वे घोड़े के पीछे-पीछे देश-देश घूमे।
अर्जुन ने कई राजाओं को हराया, पर युधिष्ठिर के कहने पर किसी के प्राण नहीं लिए। सिंधु देश में, जयद्रथ की पत्नी और दुर्योधन की बहन दुःशला अपने छोटे पोते को लेकर आईं और विनती की। अर्जुन ने बहन का मान रखते हुए युद्ध रोक दिया।
घोड़ा मणिपुर पहुँचा। वहाँ के राजा थे अर्जुन और चित्रांगदा के पुत्र बभ्रुवाहन। वे विनम्रता से पिता के स्वागत के लिए आए। पर अर्जुन बोले, 'क्षत्रिय होकर यज्ञ का घोड़ा बिना लड़े स्वीकार कर रहे हो? यह कायरता है।' अर्जुन की नाग पत्नी उलूपी ने भी बभ्रुवाहन से कहा, 'पिता से युद्ध करो, यही उनकी इच्छा है।'
पिता-पुत्र में भीषण युद्ध हुआ। अंत में बभ्रुवाहन के एक बाण से अर्जुन धरती पर गिर पड़े, और दुःख से बभ्रुवाहन भी मूर्छित हो गया। चित्रांगदा विलाप करने लगीं। तब उलूपी नागलोक की लाईं और उसे अर्जुन की छाती पर रखा। अर्जुन जैसे नींद से जाग उठे।
उलूपी ने रहस्य बताया — 'शिखंडी की आड़ लेकर भीष्म को गिराने के कारण वसुओं ने आपको शाप दिया था। आज अपने ही पुत्र के हाथों गिरकर आप उस पाप से मुक्त हो गए।' अर्जुन ने बभ्रुवाहन को गले लगाया और उसे यज्ञ में आने का निमंत्रण दिया। घोड़ा फिर आगे बढ़ा और अंत में हस्तिनापुर लौट आया।
आज के जीवन में सीख
हर कर्म का हिसाब होता है, चाहे देर से। और विनम्रता के साथ साहस भी ज़रूरी है — दोनों का संतुलन ही सच्चा चरित्र है।
सभी अध्याय
- 1राजा शांतनु और गंगा
- 2भीष्म प्रतिज्ञा
- 3सत्यवती और महर्षि व्यास
- 4अंबा की कथा
- 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
- 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
- 7पांडवों और कौरवों का जन्म
- 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
- 9एकलव्य की गुरुभक्ति
- 10रंगभूमि में कर्ण
- 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
- 12भीम और हिडिंबा
- 13द्रौपदी स्वयंवर
- 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
- 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
- 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
- 17द्रौपदी की लाज
- 18वनवास की शुरुआत
- 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
- 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
- 21यक्ष प्रश्न
- 22अज्ञातवास और कीचक
- 23उत्तर और बृहन्नला
- 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
- 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
- 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
- 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
- 28विश्वरूप दर्शन
- 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
- 30बाणों की शय्या पर भीष्म
- 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
- 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
- 33घटोत्कच का बलिदान
- 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
- 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
- 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
- 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
- 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
- 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
- 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
- 41गांधारी का शोक और शाप
- 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
- 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
- 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
- 45परीक्षित का जन्म
- 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
- 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
- 48बड़ों का वन-गमन
- 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
- 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
- 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
- 52स्वर्ग में युधिष्ठिर