सुंदरकांड · अध्याय 30
हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
अब तक की कहानी
हनुमान जी ने अशोक वाटिका में सीता जी को पा लिया है। उन्होंने पेड़ पर छिपकर रावण की धमकियाँ और त्रिजटा का सपना सुना है।
सीता जी बहुत दुखी थीं। हनुमान जी सोचने लगे — अचानक सामने आया तो वे डर जाएँगी, शायद मुझे रावण की कोई चाल समझ लें। इसलिए उन्होंने पेड़ पर बैठे-बैठे धीमे स्वर में श्रीराम की कथा गाना शुरू किया — अयोध्या, वनवास, सीता-हरण और सुग्रीव से मित्रता।
रामचरितमानस के अनुसार उन्होंने ऊपर से श्रीराम की सीता जी के पास गिरा दी। राम-नाम लिखी अँगूठी देखकर सीता जी चौंक गईं — यह यहाँ कैसे आई? क्या मेरे स्वामी सुरक्षित हैं? उनकी आँखों से आँसू बहने लगे।
तब हनुमान जी छोटे रूप में नीचे उतरे और प्रणाम किया। सीता जी को पहले शक हुआ। हनुमान जी ने श्रीराम और लक्ष्मण का ऐसा वर्णन किया, उनके दुख की ऐसी बातें बताईं, जो केवल कोई अपना ही जान सकता था। धीरे-धीरे सीता जी को विश्वास हो गया कि यह सचमुच श्रीराम का है।
हनुमान जी ने कहा — माता, आप मेरी पीठ पर बैठ जाइए, मैं अभी आपको प्रभु के पास ले चलता हूँ। सीता जी ने मना किया। उन्होंने कहा — श्रीराम स्वयं आकर रावण को हराएँ और मुझे सम्मान से ले जाएँ, यही उनके यश के योग्य है। चोरी से जाना ठीक नहीं।
हनुमान जी ने भरोसा दिलाया कि श्रीराम जल्द ही वानर सेना लेकर आएँगे। उनकी भक्ति और बल देखकर सीता जी का मन भर आया। उन्होंने हनुमान जी को वह आशीर्वाद दिया जो आज भी भक्त याद करते हैं — तुम कभी बूढ़े न हो, अमर रहो, और गुणों का भंडार बनो।
अजर अमर गुननिधि सुत होहू। करहुँ बहुत रघुनायक छोहू॥
हे पुत्र, तुम अजर, अमर और गुणों के भंडार बनो, और श्रीरघुनाथ तुम पर बहुत कृपा करें।
— श्रीरामचरितमानस, सुंदरकांड
आज के जीवन में सीख
किसी का भरोसा जीतने में समय और धीरज लगता है। और सीता जी सिखाती हैं कि जल्दी के आसान रास्ते से बेहतर है सम्मान का सही रास्ता।
सभी अध्याय
- 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
- 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
- 3विश्वामित्र और ताड़का वध
- 4अहल्या का उद्धार
- 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
- 6परशुराम का क्रोध
- 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
- 8कैकेयी के दो वरदान
- 9राम का वनवास
- 10केवट का प्रेम और गंगा पार
- 11राजा दशरथ का देहांत
- 12भरत का प्रेम और त्याग
- 13भरत मिलाप और राम की पादुका
- 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
- 15दंडक वन से पंचवटी तक
- 16शूर्पणखा
- 17खर-दूषण का वध
- 18मारीच और सोने का हिरण
- 19सीता हरण
- 20जटायु का बलिदान
- 21शबरी के बेर
- 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
- 23सुग्रीव से मित्रता
- 24बाली वध
- 25सीता की खोज और संपाती
- 26समुद्र लाँघने का निश्चय
- 27सुरसा और सिंहिका
- 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
- 29अशोक वाटिका में माता सीता
- 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
- 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
- 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
- 33लंका दहन
- 34चूड़ामणि लेकर वापसी
- 35विभीषण की शरणागति
- 36राम सेतु का निर्माण
- 37अंगद बने शांति-दूत
- 38युद्ध का आरंभ
- 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
- 40कुंभकर्ण
- 41मेघनाद वध
- 42रावण वध
- 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
- 44अयोध्या वापसी
- 45श्रीराम का राज्याभिषेक
- 46राम राज्य
- 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
- 48लव-कुश ने गाई रामायण
- 49सीता जी का धरती में समाना