लंकाकांड · अध्याय 45
श्रीराम का राज्याभिषेक
अब तक की कहानी
श्रीराम चौदह वर्ष बाद अयोध्या लौट आए हैं। भरत ने उनकी खड़ाऊँ लौटा दी हैं और पूरी नगरी उत्सव में डूबी है।
भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न ने मिलकर श्रीराम की जटाएँ खुलवाईं और उन्हें स्नान कराया। तपस्वी के वस्त्र उतरे और राजसी वस्त्र पहनाए गए। सीता जी को भी माताओं ने प्रेम से सजाया। चौदह वर्ष बाद अयोध्या ने अपने राजकुमार को फिर उसी रूप में देखा।
कुलगुरु ने शुभ मुहूर्त में राज्याभिषेक किया। श्रीराम सीता जी के साथ सिंहासन पर बैठे। पवित्र नदियों और समुद्रों के जल से उनका अभिषेक हुआ। शत्रुघ्न ने छत्र थामा, और लक्ष्मण और भरत चँवर डुलाने लगे। देवता आकाश से फूल बरसा रहे थे।
श्रीराम ने सबको उपहार दिए। वाल्मीकि रामायण में एक मीठा दृश्य है — सीता जी ने अपने गले का मोतियों का हार हाथ में लिया और श्रीराम की ओर देखा। श्रीराम ने कहा — जिससे तुम सबसे अधिक प्रसन्न हो, उसे दे दो। सीता जी ने वह हार हनुमान जी को दे दिया, जिनमें तेज, धैर्य, बल और बुद्धि सब एक साथ थे।
लोक-परंपरा में एक प्रसिद्ध कथा जुड़ी है कि हनुमान जी हार के मोती तोड़-तोड़कर देखने लगे कि इनमें राम हैं या नहीं, क्योंकि जिसमें राम न हों, वह उनके किसी काम का नहीं। भक्तों के लिए यह कथा हनुमान जी की अनन्य का प्रतीक है।
कुछ समय बाद सुग्रीव, विभीषण, अंगद और वानर वीर विदा हुए। सबकी आँखें भरी थीं। श्रीराम ने हर एक को गले लगाकर धन्यवाद दिया — तुम्हारे बिना यह विजय संभव नहीं थी।
आज के जीवन में सीख
सफलता के दिन उन सबको याद कीजिए और धन्यवाद दीजिए जिन्होंने रास्ते में साथ दिया। अकेले कोई नहीं जीतता।
सभी अध्याय
- 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
- 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
- 3विश्वामित्र और ताड़का वध
- 4अहल्या का उद्धार
- 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
- 6परशुराम का क्रोध
- 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
- 8कैकेयी के दो वरदान
- 9राम का वनवास
- 10केवट का प्रेम और गंगा पार
- 11राजा दशरथ का देहांत
- 12भरत का प्रेम और त्याग
- 13भरत मिलाप और राम की पादुका
- 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
- 15दंडक वन से पंचवटी तक
- 16शूर्पणखा
- 17खर-दूषण का वध
- 18मारीच और सोने का हिरण
- 19सीता हरण
- 20जटायु का बलिदान
- 21शबरी के बेर
- 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
- 23सुग्रीव से मित्रता
- 24बाली वध
- 25सीता की खोज और संपाती
- 26समुद्र लाँघने का निश्चय
- 27सुरसा और सिंहिका
- 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
- 29अशोक वाटिका में माता सीता
- 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
- 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
- 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
- 33लंका दहन
- 34चूड़ामणि लेकर वापसी
- 35विभीषण की शरणागति
- 36राम सेतु का निर्माण
- 37अंगद बने शांति-दूत
- 38युद्ध का आरंभ
- 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
- 40कुंभकर्ण
- 41मेघनाद वध
- 42रावण वध
- 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
- 44अयोध्या वापसी
- 45श्रीराम का राज्याभिषेक
- 46राम राज्य
- 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
- 48लव-कुश ने गाई रामायण
- 49सीता जी का धरती में समाना