लंकाकांड · अध्याय 38
युद्ध का आरंभ
अब तक की कहानी
अंगद का शांति-संदेश रावण ने ठुकरा दिया है। अब श्रीराम की वानर सेना और रावण की राक्षस सेना आमने-सामने हैं।
वानर सेना ने लंका के चारों द्वार घेर लिए। एक ओर हथियारों, रथों और हाथियों वाली राक्षस सेना थी, दूसरी ओर पेड़, चट्टानें, नाख़ून और दाँत लिए वानर और रीछ। 'जय श्रीराम' के नारों से आकाश गूँज उठा, और भयंकर युद्ध शुरू हो गया।
पहले ही दिनों में मेघनाद ने अपनी माया दिखाई। वह बादलों में अदृश्य होकर बाण चलाने लगा और उसने से श्रीराम और लक्ष्मण दोनों को बाँध दिया। दोनों भाई धरती पर गिर पड़े। वानर सेना में शोक छा गया, और लंका में ख़ुशियाँ मनाई गईं।
तभी आकाश से तेज़ हवा चली और पक्षियों के राजा प्रकट हुए। गरुड़ साँपों के शत्रु हैं। उन्हें देखते ही नाग-बाण भाग खड़े हुए। श्रीराम और लक्ष्मण के घाव भर गए, और सेना में फिर जोश लौट आया।
युद्ध आगे बढ़ा। हनुमान, अंगद, नील और सुग्रीव ने रावण के कई बड़े सेनापतियों को हराया। नील ने रावण के प्रधान सेनापति प्रहस्त का वध किया। हर दिन लंका के वीर घटते जा रहे थे।
तब रावण स्वयं युद्ध में उतरा। वाल्मीकि रामायण में एक अनोखा दृश्य है — श्रीराम ने रावण का धनुष, रथ और मुकुट काट दिया, और वह निहत्था खड़ा रह गया। श्रीराम चाहते तो उसी पल उसे मार देते, पर उन्होंने कहा — तुम थक गए हो, जाओ, विश्राम करो, कल फिर तैयार होकर आना। निहत्थे पर वार करना उनका धर्म नहीं था।
आज के जीवन में सीख
जीत का मौक़ा हो, तब भी नियम मत तोड़िए। असली वीर वही है जो ताक़त में भी मर्यादा रखे।
सभी अध्याय
- 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
- 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
- 3विश्वामित्र और ताड़का वध
- 4अहल्या का उद्धार
- 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
- 6परशुराम का क्रोध
- 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
- 8कैकेयी के दो वरदान
- 9राम का वनवास
- 10केवट का प्रेम और गंगा पार
- 11राजा दशरथ का देहांत
- 12भरत का प्रेम और त्याग
- 13भरत मिलाप और राम की पादुका
- 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
- 15दंडक वन से पंचवटी तक
- 16शूर्पणखा
- 17खर-दूषण का वध
- 18मारीच और सोने का हिरण
- 19सीता हरण
- 20जटायु का बलिदान
- 21शबरी के बेर
- 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
- 23सुग्रीव से मित्रता
- 24बाली वध
- 25सीता की खोज और संपाती
- 26समुद्र लाँघने का निश्चय
- 27सुरसा और सिंहिका
- 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
- 29अशोक वाटिका में माता सीता
- 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
- 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
- 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
- 33लंका दहन
- 34चूड़ामणि लेकर वापसी
- 35विभीषण की शरणागति
- 36राम सेतु का निर्माण
- 37अंगद बने शांति-दूत
- 38युद्ध का आरंभ
- 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
- 40कुंभकर्ण
- 41मेघनाद वध
- 42रावण वध
- 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
- 44अयोध्या वापसी
- 45श्रीराम का राज्याभिषेक
- 46राम राज्य
- 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
- 48लव-कुश ने गाई रामायण
- 49सीता जी का धरती में समाना