सुंदरकांड · अध्याय 28

हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

समुद्र लाँघकर हनुमान जी लंका के तट पर पहुँच चुके हैं। रास्ते में सुरसा और सिंहिका की परीक्षा भी पार कर ली।

रात हो चुकी थी। सोने की लंका दीपों से जगमगा रही थी, और हर द्वार पर राक्षस दे रहे थे। हनुमान जी समझ गए कि बड़े रूप में भीतर जाना असंभव है।

उन्होंने मच्छर जितना छोटा रूप धारण किया और मन में श्रीराम का नाम लिया। लक्ष्य साफ़ था — माता सीता को खोजना, और कुछ नहीं।

द्वार पर नाम की राक्षसी ने उन्हें रोक लिया। हनुमान जी ने एक ही मुक्का मारा, और वह गिर पड़ी। उठकर उसने कहा — ब्रह्मा जी ने मुझसे कहा था कि जब एक वानर के मुक्के से तुम व्याकुल हो जाओ, तब समझना कि राक्षसों का अंत निकट है।

लंकिनी ने हाथ जोड़कर हनुमान जी को आगे जाने दिया। हनुमान जी महलों, बगीचों और गलियों में माता सीता को खोजने लगे।

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥

कोसलपुर के राजा श्रीराम को हृदय में रखकर नगर में प्रवेश करो और सब काम करो।

— श्रीरामचरितमानस, सुंदरकांड

आज के जीवन में सीख

जब काम बड़ा हो, तो अहंकार छोटा रखो। नई नौकरी, नया कॉलेज, नया शहर — पहले चुपचाप माहौल समझो, लक्ष्य दिल में रखो, और ताक़त तभी दिखाओ जब ज़रूरत हो।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 5 मिनटअशोक वाटिका में माता सीता

सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

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