अरण्यकांड · अध्याय 17

खर-दूषण का वध

पढ़ने का समय 4 मिनट

इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

लक्ष्मण ने शूर्पणखा के नाक-कान काट दिए। वह बदला लेने के लिए अपने भाई खर के पास जनस्थान पहुँची।

बहन की हालत देखकर खर आग-बबूला हो गया। पहले उसने चौदह बलवान राक्षस राम को मारने भेजे। राम ने चौदह बाणों से चौदहों को समाप्त कर दिया। शूर्पणखा फिर रोती हुई खर के पास गई। अब खर स्वयं अपने भाई दूषण, सेनापति त्रिशिरा और चौदह हज़ार राक्षसों की विशाल सेना लेकर निकल पड़ा।

दूर से सेना का शोर सुनकर राम ने लक्ष्मण से कहा — ‘तुम सीता को लेकर पर्वत की गुफा में चले जाओ और उनकी रक्षा करो। इन राक्षसों से मैं अकेला निपटूँगा।’ लक्ष्मण ने आज्ञा मानी। राम ने पहना, धनुष पर डोरी चढ़ाई और अकेले सेना के सामने खड़े हो गए।

राक्षसों ने चारों ओर से राम को घेर लिया और अस्त्र-शस्त्रों की बौछार कर दी। पर राम का धनुष बिजली की तरह चल रहा था। उनके बाणों से राक्षस कटते जा रहे थे। देखते-देखते सेना बिखर गई। राम ने पहले दूषण को, फिर तीन सिरों वाले त्रिशिरा को मार गिराया।

अंत में खर बचा। उसने भयंकर युद्ध किया, राम का धनुष तक काट दिया। तब राम ने अगस्त्य मुनि का दिया हुआ धनुष उठाया। अंत में एक तेजस्वी बाण से राम ने खर का भी अंत कर दिया। मानस के अनुसार राम ने ऐसी माया रची कि राक्षस एक-दूसरे में ही राम को देखकर आपस में लड़ मरे।

लगभग एक में पूरा जनस्थान राक्षसों से मुक्त हो गया। ऋषियों और देवताओं ने राम पर फूल बरसाए। लक्ष्मण सीता को लेकर लौटे, और सीता ने प्रसन्न होकर राम को गले लगाया। पर एक राक्षस, अकंपन, बचकर लंका भाग गया — और शूर्पणखा भी। अब यह समाचार रावण तक पहुँचने वाला था।

आज के जीवन में सीख

राम ने ख़तरे के समय पहले सबसे कमज़ोर की सुरक्षा का इंतज़ाम किया, फिर लड़ाई की। अच्छा नेता पहले अपनों की सुरक्षा सोचता है।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 5 मिनटमारीच और सोने का हिरण

सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार