अयोध्याकांड · अध्याय 11

राजा दशरथ का देहांत

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

केवट ने राम को गंगा पार कराई। राम, सीता और लक्ष्मण चित्रकूट में पर्णकुटी बनाकर रहने लगे। सुमंत्र ख़ाली रथ लेकर अयोध्या लौटे।

जब सुमंत्र ख़ाली रथ लेकर अयोध्या लौटे, तो पूरा नगर फिर से रो पड़ा। दशरथ ने पूछा — ‘मेरे राम ने क्या कहा? सीता ने क्या कहा?’ सुमंत्र ने सारा संदेश सुनाया। राजा का दुख और गहरा हो गया। वे कौसल्या के महल में रहने लगे और दिन-रात राम का नाम लेते रहे।

एक रात दशरथ ने कौसल्या को अपने जीवन की एक पुरानी घटना सुनाई। युवावस्था में वे शिकार के लिए सरयू के किनारे गए थे। अँधेरे में उन्होंने पानी भरने की आवाज़ सुनी और समझा कि कोई हाथी पानी पी रहा है। आवाज़ की दिशा में उन्होंने बाण चला दिया।

पर वह हाथी नहीं, एक मुनि-कुमार था, जो अपने अंधे और बूढ़े माता-पिता के लिए पानी भर रहा था। लोक-परंपरा में उसे श्रवण कुमार कहा जाता है। मरते-मरते उसने दशरथ से कहा कि मेरे प्यासे माता-पिता को पानी पिला देना। दशरथ घड़ा लेकर उनके पास गए और काँपते हुए सब बता दिया।

बेटे की मृत्यु का समाचार सुनकर उस बूढ़े पिता ने दशरथ को श्राप दिया — ‘जैसे मैं पुत्र-वियोग में प्राण त्याग रहा हूँ, वैसे ही तुम भी एक दिन पुत्र के वियोग में मरोगे।’ और दोनों ने वहीं प्राण त्याग दिए। दशरथ बोले — ‘कौसल्या, आज वह श्राप सच हो रहा है।’

राम के वन जाने की छठी रात, ‘हा राम, हा राम’ कहते हुए राजा दशरथ ने प्राण त्याग दिए। सुबह महल में हाहाकार मच गया। उस समय भरत और शत्रुघ्न केकय देश में थे। गुरु वसिष्ठ ने राजा के शरीर को तेल में सुरक्षित रखवाया, और तेज़ भरत को बुलाने भेजे — पर उन्हें कुछ भी बताने से मना किया।

आज के जीवन में सीख

दशरथ की एक जल्दबाज़ी की भूल का दुख बरसों बाद लौटकर आया। हमारे काम के परिणाम होते हैं, इसलिए बिना देखे-समझे कोई क़दम नहीं उठाना चाहिए।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 5 मिनटभरत का प्रेम और त्याग

सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

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