लंकाकांड · अध्याय 36

राम सेतु का निर्माण

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

विभीषण श्रीराम की शरण में आ गए हैं और उनका लंका के राजा के रूप में अभिषेक हो चुका है। अब सेना के सामने विशाल समुद्र है।

करोड़ों वानरों की सेना समुद्र कैसे पार करे? विभीषण ने सलाह दी कि समुद्र देव से विनती की जाए। श्रीराम ने तट पर बिछाया और हाथ जोड़कर बैठ गए। एक दिन बीता, दूसरा, फिर तीसरा। समुद्र ने कोई उत्तर नहीं दिया।

तब श्रीराम ने लक्ष्मण से धनुष-बाण माँगा। उन्होंने कहा — विनम्रता को यह कमज़ोरी समझ बैठा है। जैसे ही उन्होंने बाण चढ़ाया, समुद्र में हलचल मच गई, जीव-जंतु काँपने लगे। समुद्र देव स्वयं हाथ जोड़कर प्रकट हुए।

समुद्र देव बोले — प्रभु, मेरा स्वभाव गहरा और अथाह रहना है, मैं उसे नहीं बदल सकता। पर आपकी सेना में और नील हैं। नल विश्वकर्मा के पुत्र हैं। वे जो पत्थर डालेंगे, मैं उन्हें थामे रखूँगा। श्रीराम ने बाण किसी और दिशा में छोड़ दिया।

फिर काम शुरू हुआ। वानर पेड़, चट्टानें और पहाड़ उखाड़कर लाने लगे, और नल-नील उन्हें जोड़ते गए। वाल्मीकि रामायण के अनुसार सौ योजन लंबा पुल पाँच दिनों में बन गया। लोक-परंपरा में कहा जाता है कि जिन पत्थरों पर 'राम' लिखा गया, वे पानी पर तैरने लगे।

रामचरितमानस के अनुसार सेतु बनने से पहले श्रीराम ने वहीं तट पर शिवलिंग की स्थापना करके पूजा की। यही स्थान आज रामेश्वरम के नाम से प्रसिद्ध है। फिर पूरी सेना 'जय श्रीराम' के नारे लगाते हुए समुद्र पार लंका की ओर बढ़ चली।

बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीनि दिन बीति। बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति॥

तीन दिन बीत गए, पर जड़ समुद्र विनती नहीं मान रहा था। तब श्रीराम क्रोध से बोले — भय के बिना प्रीति नहीं होती।

— श्रीरामचरितमानस, सुंदरकांड

आज के जीवन में सीख

पहले विनम्रता से माँगिए, धैर्य रखिए। पर अगर कोई आपकी नरमी को कमज़ोरी समझे, तो दृढ़ता दिखाना भी ज़रूरी है। और बड़ा काम टीम से होता है।

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सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

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