अरण्यकांड · अध्याय 15

दंडक वन से पंचवटी तक

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

अत्रि और अनसूया से आशीर्वाद लेकर राम, सीता और लक्ष्मण दंडकारण्य के घने वन में प्रवेश कर गए।

दंडक वन में घुसते ही विराध नाम का एक भयंकर राक्षस सीता को उठाकर ले जाने लगा। राम और लक्ष्मण ने उससे युद्ध करके उसका अंत किया। आगे वे ऋषि शरभंग के आश्रम गए, जिन्होंने राम के दर्शन के बाद ही शरीर त्यागा। वहाँ अनेक ऋषि राम के पास आए और बताया कि राक्षस किस तरह तपस्वियों को मार डालते हैं।

श्रीरामचरितमानस के अनुसार ऋषियों ने राम को हड्डियों का एक ढेर दिखाया — ये उन मुनियों की अस्थियाँ थीं जिन्हें राक्षस खा गए थे। यह देखकर राम की आँखें भर आईं और उन्होंने हाथ उठाकर प्रण किया कि मैं धरती को राक्षसों से मुक्त कर दूँगा। इस तरह वनवास का एक बड़ा उद्देश्य शुरू हुआ।

राम कई वर्षों तक अलग-अलग ऋषियों के आश्रमों में रहे — सुतीक्ष्ण मुनि के आश्रम में भी। वाल्मीकि रामायण के अनुसार इसी तरह लगभग दस वर्ष बीत गए। फिर वे महर्षि के पास पहुँचे। अगस्त्य ने राम को दिव्य धनुष, अक्षय तरकश और तलवार दी, और रहने के लिए गोदावरी नदी के किनारे पंचवटी की सलाह दी।

पंचवटी के रास्ते में उन्हें एक विशाल गिद्ध मिला — जटायु। जटायु ने बताया कि वह राजा दशरथ का पुराना मित्र है। उसने कहा — ‘जब आप दोनों भाई बाहर जाएँगे, तब मैं सीता की रक्षा करूँगा।’ राम ने उसे पिता के मित्र की तरह आदर दिया।

पंचवटी अत्यंत सुंदर स्थान था — पाँच वट के पेड़, पास में बहती गोदावरी, फूलों से भरे वन और हिरणों के झुंड। लक्ष्मण ने बड़े प्रेम से एक सुंदर बनाई। राम ने उन्हें गले लगा लिया। मानस में यहीं लक्ष्मण राम से ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के बारे में पूछते हैं, और राम उन्हें सरल शब्दों में समझाते हैं।

आज के जीवन में सीख

राम ने दूसरों का दुख देखा तो उसे अपनी ज़िम्मेदारी मान लिया। जब हम किसी की तकलीफ़ देखें और कुछ कर सकें, तो मुँह नहीं मोड़ना चाहिए।

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सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

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