अरण्यकांड · अध्याय 19

सीता हरण

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अब तक की कहानी

मारीच सोने का हिरण बनकर राम को दूर ले गया। राम के बाण से मरते समय उसने राम की आवाज़ में ‘हा सीता, हा लक्ष्मण’ पुकारा।

कुटिया में सीता ने वह पुकार सुनी और घबरा गईं। उन्होंने लक्ष्मण से कहा — ‘तुम्हारे भैया संकट में हैं, तुरंत जाओ!’ लक्ष्मण ने समझाया — ‘माँ, राम को तीनों लोकों में कोई नहीं हरा सकता। यह राक्षस की चाल है। भैया ने मुझे आपकी रक्षा का आदेश दिया है।’

पर डर और चिंता में सीता ने लक्ष्मण से बहुत कठोर बातें कह दीं, यहाँ तक कि उनकी नीयत पर भी शक कर डाला। ये शब्द लक्ष्मण के हृदय में तीर की तरह चुभे। आँखों में आँसू लिए, उन्होंने वन देवताओं से सीता की रक्षा की प्रार्थना की और न चाहते हुए भी राम को खोजने चल पड़े। लोक-परंपरा कहती है कि जाने से पहले उन्होंने कुटिया के चारों ओर एक रेखा खींची — जिसे कहते हैं।

जैसे ही लक्ष्मण गए, रावण एक साधु का वेश बनाकर कुटिया के द्वार पर आया और भिक्षा माँगने लगा। सीता ने अतिथि को साधु समझकर आदर से बिठाया और भोजन दिया। रावण ने सीता की सुंदरता की प्रशंसा की और पूछा कि वे कौन हैं। सीता ने सरलता से अपना पूरा परिचय दे दिया।

तब रावण ने अपना असली रूप दिखाया और कहा — ‘मैं लंका का राजा रावण हूँ। मेरी रानी बनो।’ सीता ने निडर होकर उसे धिक्कारा — ‘राम सिंह हैं, तुम सियार। तुम सूरज की रोशनी को छूने की कोशिश कर रहे हो।’ क्रोधित रावण ने सीता को ज़बरदस्ती उठाया और अपने रथ में बिठाकर आकाश में उड़ चला।

सीता रोती हुई पुकारती रहीं — ‘हा राम! हा लक्ष्मण!’ उन्होंने पेड़ों, नदियों, पशु-पक्षियों से विनती की कि राम को बताना कि रावण मुझे ले गया। पूरा वन जैसे शोक में डूब गया। सीता की पुकार सुनकर एक पेड़ पर सो रहा बूढ़ा जटायु जाग उठा।

आज के जीवन में सीख

डर में कहे गए कठोर शब्द सबसे प्रिय लोगों को भी चोट पहुँचाते हैं। घबराहट में भी अपनी ज़बान पर क़ाबू रखना बहुत ज़रूरी है।

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सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

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