बालकांड · अध्याय 6

परशुराम का क्रोध

पढ़ने का समय 4 मिनट

इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

राम ने शिव धनुष तोड़ा और सीता से विवाह हुआ। चारों भाइयों का विवाह मिथिला में धूमधाम से हुआ।

शिव धनुष टूटने की गूँज दूर महेंद्र पर्वत तक पहुँची, जहाँ भगवान परशुराम तप कर रहे थे। परशुराम शिव के परम भक्त थे और उन्होंने यह धनुष भी शिव से जुड़ा माना था। वे बहुत क्रोधी स्वभाव के थे और अपने से अनेक अन्यायी राजाओं का अंत कर चुके थे।

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, जब बारात मिथिला से अयोध्या लौट रही थी, तब रास्ते में अचानक आँधी चली और परशुराम सामने आ खड़े हुए। श्रीरामचरितमानस में यह प्रसंग स्वयंवर-सभा में ही होता है। दोनों में परशुराम क्रोध से भरे हुए हैं और पूछते हैं — ‘किसने मेरे गुरु शिव का धनुष तोड़ा?’

मानस में इस प्रसंग का सबसे प्रसिद्ध भाग है परशुराम और लक्ष्मण का संवाद। लक्ष्मण हँसकर कहते हैं कि बचपन में हमने ऐसे कितने ही धनुष तोड़े हैं, एक पुराने धनुष पर इतना क्रोध क्यों? परशुराम और भड़क उठते हैं। तब राम बीच में आकर अत्यंत विनम्र स्वर में कहते हैं — ‘धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा।’

परशुराम ने राम की परीक्षा ली। उन्होंने भगवान विष्णु का धनुष राम को देते हुए कहा — ‘यदि तुम सच में वीर हो, तो इस पर बाण चढ़ाकर दिखाओ।’ राम ने सहज भाव से धनुष लिया, उस पर डोरी चढ़ाई और बाण भी चढ़ा दिया।

उसी क्षण परशुराम समझ गए कि राम स्वयं विष्णु के अवतार हैं। उनका क्रोध शांत हो गया। उन्होंने राम की स्तुति की, उन्हें आशीर्वाद दिया और तप करने वन को लौट गए। बारात आनंद से अयोध्या पहुँची, जहाँ माताओं ने नई बहुओं का स्वागत किया और कुछ समय सबने सुख से बिताया।

आज के जीवन में सीख

लक्ष्मण के तीखे जवाबों ने क्रोध बढ़ाया, राम की विनम्रता ने उसे शांत किया। गुस्से का जवाब गुस्से से नहीं, शांति से दिया जाए तो झगड़ा ख़त्म होता है।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 4 मिनटराज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा

सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार