बालकांड · अध्याय 4

अहल्या का उद्धार

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

राम ने ताड़का और सुबाहु का वध कर विश्वामित्र का यज्ञ पूरा कराया। अब विश्वामित्र दोनों भाइयों को मिथिला ले जा रहे हैं।

यज्ञ पूरा होने के बाद विश्वामित्र ने बताया कि मिथिला के राजा जनक एक बड़ा यज्ञ कर रहे हैं, और उनके पास भगवान शिव का एक अद्भुत धनुष है। दोनों भाई गुरु के साथ चल पड़े। रास्ते में गंगा पार की और गुरु ने उन्हें गंगा के धरती पर आने की कथा भी सुनाई।

मिथिला के पास उन्हें एक सुनसान आश्रम दिखा। न वहाँ पक्षी थे, न कोई जीव। राम ने पूछा — ‘गुरुदेव, यह आश्रम इतना उजाड़ क्यों है?’ विश्वामित्र ने बताया कि यह महर्षि गौतम का आश्रम था। उनकी पत्नी अहल्या अत्यंत सुंदर और पवित्र थीं।

एक दिन देवराज इंद्र ने छल से गौतम का रूप धरा और आश्रम में आए। जब गौतम लौटे और सब जाना, तो उन्होंने इंद्र को श्राप दिया, और अहल्या को भी — कि वह हज़ारों वर्षों तक यहीं अदृश्य रहकर, बिना अन्न के, तपस्या करती रहे। गौतम ने यह भी कहा कि जब श्रीराम इस आश्रम में आएँगे, तब अहल्या श्राप से मुक्त होगी।

राम ने जैसे ही आश्रम में कदम रखा, अहल्या अपने तेजस्वी रूप में प्रकट हो गईं। वाल्मीकि रामायण में वे तपस्या के कारण अदृश्य थीं। तुलसीदास जी के श्रीरामचरितमानस में वे शिला (पत्थर) बन गई थीं, और राम के चरणों के स्पर्श से फिर स्त्री बनीं। यह दूसरा रूप ही लोगों में अधिक प्रसिद्ध है।

राम और लक्ष्मण ने अहल्या के चरण छूकर उन्हें प्रणाम किया। अहल्या ने आदर से उनका किया। उसी समय महर्षि गौतम भी लौट आए और पत्नी को फिर से अपनाया। जो स्त्री वर्षों से अकेली और उपेक्षित थी, उसे राम ने सम्मान लौटाया। इस प्रसंग को ‘अहल्या ’ कहते हैं।

आज के जीवन में सीख

राम ने अहल्या को दोषी की तरह नहीं, आदरणीय की तरह देखा। किसी की पुरानी गलती या दुख के आधार पर उसका आज का सम्मान नहीं छीनना चाहिए।

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सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

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