साप्ताहिक व्रत · अध्याय 1
सोमवार व्रत कथा
अब तक की कहानी
सोमवार भगवान शिव का दिन माना जाता है। यह कथा एक साहूकार और उसके पुत्र की है।
परंपरा से सोमवार का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के लिए रखा जाता है। भक्त सुबह स्नान करके शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाते हैं, दिन भर व्रत रखते हैं और शाम को पूजा के बाद एक बार भोजन करते हैं। पूजा के बाद यह कथा सुनी जाती है। अब कथा सुनिए।
एक नगर में एक धनी रहता था। उसके पास सब कुछ था, पर कोई संतान नहीं थी। वह हर सोमवार व्रत रखता और शिव मंदिर में दीपक जलाता। उसकी भक्ति देखकर माता पार्वती ने शिवजी से कहा कि इसकी इच्छा पूरी कीजिए। शिवजी बोले कि हर किसी को अपने कर्मों का फल मिलता है। पार्वती जी के आग्रह पर शिवजी ने उसे पुत्र का वरदान दिया, पर कहा कि बालक केवल बारह वर्ष जीएगा।
साहूकार यह बात सुन चुका था, फिर भी उसने व्रत और पूजा नहीं छोड़ी। पुत्र हुआ। जब वह ग्यारह वर्ष का हुआ, तो साहूकार ने उसे उसके मामा के साथ पढ़ने के लिए काशी भेज दिया और कहा कि रास्ते में यज्ञ करते और ब्राह्मणों को भोजन कराते जाना। रास्ते में एक नगर में राजकुमारी का विवाह हो रहा था। दूल्हा एक आँख से काना था, इसलिए उसके पिता ने साहूकार के सुंदर बेटे को दूल्हा बनाकर विवाह करवा दिया।
लड़का सच्चा था। उसने राजकुमारी की चुनरी पर लिख दिया — तुम्हारा विवाह मुझसे हुआ है, पर जिस राजकुमार के साथ तुम्हें भेजा जाएगा वह एक आँख से काना है। मैं पढ़ने काशी जा रहा हूँ। राजकुमारी ने सच पढ़ लिया और काने राजकुमार के साथ जाने से मना कर दिया। उधर काशी में लड़का पढ़ता रहा। जिस दिन वह बारह वर्ष का हुआ, यज्ञ के समय उसके प्राण निकल गए। मामा रोने लगा।
उसी समय शिव-पार्वती वहाँ से गुज़र रहे थे। रोना सुनकर पार्वती जी का मन पिघल गया और उन्होंने शिवजी से उसे जीवन देने की विनती की। शिवजी ने बालक को फिर से जीवन दे दिया। पढ़ाई पूरी करके वह मामा के साथ लौटा, उसी नगर में राजकुमारी को साथ लिया और घर पहुँचा। उसके माता-पिता ने ठान रखा था कि बेटा न लौटा तो वे भी प्राण दे देंगे। बेटे को देखकर वे आनंद से भर गए।
आज के जीवन में सीख
साहूकार ने कठिन बात जानकर भी भक्ति नहीं छोड़ी, और बेटे ने मुश्किल समय में भी सच लिखा। धैर्य और सच्चाई दोनों साथ चलें तो रास्ता निकलता है।
सभी अध्याय
- 1सोमवार व्रत कथा
- 2सोलह सोमवार व्रत कथा
- 3मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)
- 4बुधवार व्रत कथा
- 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
- 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
- 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
- 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
- 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
- 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
- 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
- 12प्रदोष व्रत कथा
- 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
- 14एकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म
- 15पूर्णिमा व्रत कथा
- 16मकर संक्रांति की कथा
- 17महाशिवरात्रि व्रत कथा
- 18शीतला अष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा
- 19नवरात्रि व्रत कथा
- 20वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
- 21निर्जला एकादशी व्रत कथा — भीमसेनी एकादशी
- 22हरियाली तीज व्रत कथा
- 23रक्षा बंधन की कथा
- 24जन्माष्टमी व्रत कथा
- 25हरतालिका तीज व्रत कथा
- 26गणेश चतुर्थी कथा — चंद्रमा और स्यमंतक मणि
- 27ऋषि पंचमी व्रत कथा
- 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
- 29अहोई अष्टमी व्रत कथा
- 30गोवर्धन पूजा की कथा
- 31छठ पूजा की कथा
- 32देव उठनी एकादशी की कथा
- 33तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी