त्योहार व्रत · अध्याय 28
करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
अब तक की कहानी
करवा चौथ पर विवाहित स्त्रियाँ चाँद निकलने तक व्रत रखती हैं। इसकी सबसे प्रसिद्ध कथा सात भाइयों की बहन वीरावती की है।
करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को, दशहरे और दिवाली के बीच आता है। परंपरा के अनुसार विवाहित स्त्रियाँ सूर्योदय से पहले सास की दी हुई खाती हैं, फिर चाँद निकलने तक निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को सोलह श्रृंगार करके करवे (मिट्टी के टोंटीदार लोटे) के साथ पूजा होती है और कथा सुनी जाती है। रात में छलनी से चाँद और फिर पति को देखकर, अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी, जिसका नाम वीरावती था। सातों भाई अपनी बहन को बहुत प्यार करते थे। विवाह के बाद वीरावती पहली बार करवा चौथ पर मायके में थी। उसने पूरा दिन बिना पानी के व्रत रखा। शाम होते-होते वह भूख-प्यास से बेहाल होकर बेहोश-सी होने लगी।
भाइयों से बहन की हालत देखी न गई। उन्होंने एक उपाय सोचा। एक भाई दूर पीपल के पेड़ पर दीया और छलनी लेकर चढ़ गया, जिससे लगे कि चाँद निकल आया है। भाइयों ने कहा — 'बहन, चाँद निकल आया, अर्घ्य देकर खाना खा लो।' वीरावती ने भरोसा करके व्रत खोल दिया।
पहला कौर खाते ही उसे बुरी ख़बरें मिलने लगीं, और अंत में समाचार आया कि उसके पति के प्राण संकट में हैं। वह दौड़ी-दौड़ी ससुराल पहुँची। वहाँ उसे पता चला कि भाइयों के प्रेम में किया गया छल उसके व्रत को अधूरा कर गया था। वह पछतावे से रोने लगी।
कथा के अनुसार देवी इंद्राणी (कुछ कथाओं में माता पार्वती) ने उसे दर्शन दिए और कहा कि पूरे साल हर चतुर्थी को श्रद्धा से व्रत करो। वीरावती ने साल भर पति की सेवा की और हर चौथ का व्रत निभाया। अगली करवा चौथ पर उसने पूरी विधि से व्रत किया, और उसके पति को नया जीवन मिला। कई जगह करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री की कथा भी सुनाई जाती है।
आज के जीवन में सीख
प्यार में भी झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। और जब भूल हो जाए, तो वीरावती की तरह धैर्य और लगन से उसे सुधारना चाहिए।
सभी अध्याय
- 1सोमवार व्रत कथा
- 2सोलह सोमवार व्रत कथा
- 3मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)
- 4बुधवार व्रत कथा
- 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
- 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
- 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
- 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
- 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
- 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
- 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
- 12प्रदोष व्रत कथा
- 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
- 14एकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म
- 15पूर्णिमा व्रत कथा
- 16मकर संक्रांति की कथा
- 17महाशिवरात्रि व्रत कथा
- 18शीतला अष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा
- 19नवरात्रि व्रत कथा
- 20वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
- 21निर्जला एकादशी व्रत कथा — भीमसेनी एकादशी
- 22हरियाली तीज व्रत कथा
- 23रक्षा बंधन की कथा
- 24जन्माष्टमी व्रत कथा
- 25हरतालिका तीज व्रत कथा
- 26गणेश चतुर्थी कथा — चंद्रमा और स्यमंतक मणि
- 27ऋषि पंचमी व्रत कथा
- 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
- 29अहोई अष्टमी व्रत कथा
- 30गोवर्धन पूजा की कथा
- 31छठ पूजा की कथा
- 32देव उठनी एकादशी की कथा
- 33तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी