त्योहार व्रत · अध्याय 19
नवरात्रि व्रत कथा
अब तक की कहानी
नवरात्रि माँ दुर्गा के नौ रूपों की नौ रातें हैं। यहाँ दो कथाएँ हैं — महिषासुर पर देवी की विजय, और श्रीराम का नवरात्र व्रत।
साल में दो मुख्य नवरात्रि आती हैं — चैत्र (मार्च-अप्रैल) और शारदीय (आश्विन, सितंबर-अक्टूबर)। परंपरा के अनुसार पहले दिन होती है, जौ बोए जाते हैं और अखंड दीप जलाया जाता है। नौ दिन माँ के नौ रूपों — शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक — की पूजा होती है। कई भक्त फलाहार पर व्रत रखते हैं। अष्टमी या नवमी को कन्या-पूजन होता है, और शारदीय नवरात्रि के बाद दशहरा आता है।
पहली कथा मार्कंडेय पुराण के देवी माहात्म्य से है। महिषासुर नाम के असुर को वरदान था कि कोई पुरुष उसे नहीं मार सकेगा। घमंड में उसने देवताओं को हराकर स्वर्ग छीन लिया। दुखी देवता ब्रह्मा जी के साथ शिव और विष्णु के पास गए। उनकी पीड़ा सुनकर सभी देवताओं के क्रोध से एक महान तेज निकला, और उस तेज से देवी प्रकट हुईं।
सभी देवताओं ने देवी को अपने-अपने अस्त्र दिए — शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने चक्र, इंद्र ने वज्र, हिमालय ने सवारी के लिए सिंह। देवी ने महिषासुर की विशाल सेना का नाश किया। महिषासुर रूप बदल-बदलकर लड़ता रहा — कभी भैंसा, कभी सिंह, कभी हाथी। अंत में देवी ने उसका वध किया, और देवताओं ने उनकी स्तुति की।
दूसरी कथा देवी भागवत पुराण में आती है। सीता जी के हरण के बाद श्रीराम किष्किंधा में बहुत चिंतित थे। तब नारद मुनि आए और उन्हें आश्विन मास में नवरात्र व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि पहले भी बड़े-बड़े देवताओं और ऋषियों ने कठिन समय में देवी की शरण ली थी।
श्रीराम ने विधि से नौ दिन उपवास रखा और देवी की पूजा की। कथा के अनुसार अष्टमी की रात देवी सिंह पर बैठकर प्रकट हुईं और उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया। इसके बाद श्रीराम ने समुद्र पर सेतु बनवाया और लंका की ओर बढ़े। इसलिए नवरात्रि के बाद विजयादशमी आती है — बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व।
आज के जीवन में सीख
महिषासुर का घमंड उसे ले डूबा, और श्रीराम ने कठिन समय में भी धैर्य और श्रद्धा नहीं छोड़ी। अपने भीतर की शक्ति को जगाना ही नवरात्रि का अर्थ है।
सभी अध्याय
- 1सोमवार व्रत कथा
- 2सोलह सोमवार व्रत कथा
- 3मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)
- 4बुधवार व्रत कथा
- 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
- 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
- 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
- 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
- 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
- 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
- 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
- 12प्रदोष व्रत कथा
- 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
- 14एकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म
- 15पूर्णिमा व्रत कथा
- 16मकर संक्रांति की कथा
- 17महाशिवरात्रि व्रत कथा
- 18शीतला अष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा
- 19नवरात्रि व्रत कथा
- 20वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
- 21निर्जला एकादशी व्रत कथा — भीमसेनी एकादशी
- 22हरियाली तीज व्रत कथा
- 23रक्षा बंधन की कथा
- 24जन्माष्टमी व्रत कथा
- 25हरतालिका तीज व्रत कथा
- 26गणेश चतुर्थी कथा — चंद्रमा और स्यमंतक मणि
- 27ऋषि पंचमी व्रत कथा
- 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
- 29अहोई अष्टमी व्रत कथा
- 30गोवर्धन पूजा की कथा
- 31छठ पूजा की कथा
- 32देव उठनी एकादशी की कथा
- 33तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी