मासिक व्रत · अध्याय 10
सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
अब तक की कहानी
गरीब ब्राह्मण और लकड़हारे ने श्रद्धा से सत्यनारायण व्रत किया। अब कथा एक व्यापारी की है जिसने व्रत का वचन दिया पर निभाया नहीं।
इस अध्याय को भी उसी विधि से सुना जाता है — व्रत रखकर, सत्यनारायण भगवान की पूजा के बाद। सूत जी आगे बोले — प्राचीन काल में उल्कामुख नाम के एक सत्यवादी राजा थे। एक दिन वे भद्रशीला नदी के किनारे अपनी रानी के साथ सत्यनारायण व्रत कर रहे थे। उसी समय साधु नाम का एक व्यापारी अपनी नाव लेकर वहाँ रुका।
व्यापारी ने राजा से पूछा कि यह कौन-सा व्रत है। राजा ने बताया कि यह सत्यनारायण का व्रत है। व्यापारी की कोई संतान नहीं थी। उसने वचन दिया — अगर मेरे घर संतान होगी तो मैं भी यह व्रत करूँगा। घर लौटकर उसने पत्नी लीलावती को बताया। समय आने पर उनके घर एक सुंदर बेटी हुई, जिसका नाम कलावती रखा गया।
लीलावती ने पति को वचन याद दिलाया। व्यापारी बोला — बेटी के विवाह के समय करेंगे। बेटी बड़ी हुई और उसका विवाह एक योग्य वणिक युवक से हो गया, पर व्यापारी फिर भी व्रत करना भूल गया। कथा कहती है कि इस के टूटने से उस पर संकट आया। वह दामाद के साथ व्यापार करने राजा चंद्रकेतु के नगर रत्नसारपुर गया।
वहाँ कुछ चोरों ने राजा का धन चुराया और सिपाहियों से बचने के लिए वह धन व्यापारी और दामाद के पास फेंककर भाग गए। सिपाहियों ने दोनों को ही चोर समझ लिया। राजा ने उन्हें कारागार में डाल दिया और उनका सारा धन ले लिया। उधर घर पर चोरी हो गई, और लीलावती और कलावती गरीबी में दिन काटने लगीं।
एक दिन भूखी कलावती ने एक घर में सत्यनारायण कथा होते देखी और प्रसाद लेकर घर आई। उसने माँ को बताया। लीलावती को वचन याद आया। माँ-बेटी ने श्रद्धा से व्रत किया और भगवान से क्षमा माँगी। उसी रात भगवान ने राजा चंद्रकेतु को सपने में कहा कि दोनों निर्दोष हैं। सुबह राजा ने उन्हें छोड़ दिया, सम्मान दिया और उनका धन दुगना करके लौटाया।
आज के जीवन में सीख
मुसीबत में वादा करना आसान है, सुख में उसे निभाना कठिन। जो वचन दें, उसे टालें नहीं।
सभी अध्याय
- 1सोमवार व्रत कथा
- 2सोलह सोमवार व्रत कथा
- 3मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)
- 4बुधवार व्रत कथा
- 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
- 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
- 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
- 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
- 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
- 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
- 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
- 12प्रदोष व्रत कथा
- 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
- 14एकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म
- 15पूर्णिमा व्रत कथा
- 16मकर संक्रांति की कथा
- 17महाशिवरात्रि व्रत कथा
- 18शीतला अष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा
- 19नवरात्रि व्रत कथा
- 20वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
- 21निर्जला एकादशी व्रत कथा — भीमसेनी एकादशी
- 22हरियाली तीज व्रत कथा
- 23रक्षा बंधन की कथा
- 24जन्माष्टमी व्रत कथा
- 25हरतालिका तीज व्रत कथा
- 26गणेश चतुर्थी कथा — चंद्रमा और स्यमंतक मणि
- 27ऋषि पंचमी व्रत कथा
- 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
- 29अहोई अष्टमी व्रत कथा
- 30गोवर्धन पूजा की कथा
- 31छठ पूजा की कथा
- 32देव उठनी एकादशी की कथा
- 33तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी