मासिक व्रत · अध्याय 9
सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
अब तक की कहानी
सत्यनारायण कथा स्कंद पुराण के रेवा खंड से मानी जाती है। इसके पाँच अध्याय हैं। यहाँ पहले दो।
परंपरा से सत्यनारायण व्रत पूर्णिमा, संक्रांति या किसी भी शुभ दिन, विशेषकर शाम के समय किया जाता है। भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप की पूजा होती है, केले के पत्तों से मंडप सजाया जाता है, और गेहूँ के आटे या सूजी, घी, दूध, चीनी और केले से बनता है। कथा के पाँचों अध्याय सुने जाते हैं, आरती होती है, और सबको प्रसाद बाँटा जाता है।
एक बार नैमिषारण्य में शौनक आदि ऋषियों ने सूत जी से पूछा — कलियुग में मनुष्य अपने दुख कैसे दूर करें? सूत जी ने बताया कि यही प्रश्न एक बार नारद जी ने भगवान विष्णु से पूछा था। नारद जी पृथ्वी पर घूमते हुए लोगों को तरह-तरह के दुखों से घिरा देखकर विष्णु लोक गए। भगवान ने कहा — सत्यनारायण का व्रत श्रद्धा से करने से मन को शांति और जीवन में सुख मिलता है, ऐसा माना जाता है।
दूसरे अध्याय में सूत जी ने बताया कि सबसे पहले यह व्रत किसने किया। काशी नगरी में एक बहुत गरीब ब्राह्मण रहता था, जो भिक्षा माँगकर जीवन चलाता था। उसकी दशा देखकर भगवान स्वयं एक बूढ़े ब्राह्मण के रूप में आए और उसे सत्यनारायण व्रत की विधि बताई। उस ब्राह्मण ने भिक्षा में जो मिला, उसी से श्रद्धा से व्रत किया।
कथा कहती है कि उसके बाद उसकी गरीबी दूर हो गई और वह हर महीने यह व्रत करने लगा। एक दिन जब वह पूजा कर रहा था, तब एक लकड़हारा प्यास से थका हुआ वहाँ आया। उसने पूछा कि यह कौन-सी पूजा है। ब्राह्मण ने उसे सब बताया। लकड़हारे ने सोचा — आज लकड़ी बेचकर जो पैसे मिलेंगे, उनसे मैं भी यह व्रत करूँगा।
उस दिन उसकी लकड़ी दुगने दाम में बिकी। उसने केले, घी, दूध, आटा और गुड़ खरीदा, अपने परिवार और पड़ोसियों को बुलाया और प्रेम से कथा करवाई। कथा के अनुसार उसका जीवन भी सुखी हो गया। सूत जी कहते हैं, इस व्रत में धन से अधिक भाव का महत्व है — गरीब ब्राह्मण और लकड़हारे ने जितना था, उतने से ही पूजा की।
आज के जीवन में सीख
पूजा का मूल्य उसकी भव्यता से नहीं, मन के भाव से है। जितना है, उतने में प्रेम से किया गया काम ही सबसे बड़ा है।
सभी अध्याय
- 1सोमवार व्रत कथा
- 2सोलह सोमवार व्रत कथा
- 3मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)
- 4बुधवार व्रत कथा
- 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
- 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
- 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
- 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
- 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
- 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
- 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
- 12प्रदोष व्रत कथा
- 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
- 14एकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म
- 15पूर्णिमा व्रत कथा
- 16मकर संक्रांति की कथा
- 17महाशिवरात्रि व्रत कथा
- 18शीतला अष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा
- 19नवरात्रि व्रत कथा
- 20वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
- 21निर्जला एकादशी व्रत कथा — भीमसेनी एकादशी
- 22हरियाली तीज व्रत कथा
- 23रक्षा बंधन की कथा
- 24जन्माष्टमी व्रत कथा
- 25हरतालिका तीज व्रत कथा
- 26गणेश चतुर्थी कथा — चंद्रमा और स्यमंतक मणि
- 27ऋषि पंचमी व्रत कथा
- 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
- 29अहोई अष्टमी व्रत कथा
- 30गोवर्धन पूजा की कथा
- 31छठ पूजा की कथा
- 32देव उठनी एकादशी की कथा
- 33तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी