साप्ताहिक व्रत · अध्याय 3

मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

मंगलवार हनुमान जी का दिन माना जाता है। यह कथा एक ब्राह्मण दंपति की है।

परंपरा से मंगलवार का व्रत हनुमान जी के लिए रखा जाता है, अक्सर लगातार इक्कीस मंगलवार। भक्त लाल वस्त्र पहनते हैं, हनुमान जी को सिंदूर, लाल फूल और गुड़-चने का भोग लगाते हैं, हनुमान चालीसा पढ़ते हैं और दिन में एक बार बिना नमक का भोजन करते हैं, जैसे गेहूँ और गुड़ से बना। फिर यह कथा सुनी जाती है।

एक नगर में एक ब्राह्मण और उसकी पत्नी रहते थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। ब्राह्मण हनुमान जी की पूजा करने वन में चला गया और वहीं प्रार्थना करने लगा। घर पर उसकी पत्नी हर मंगलवार व्रत रखती, हनुमान जी को भोग लगाती और उसके बाद ही भोजन करती।

एक मंगलवार किसी कारण वह भोग नहीं बना पाई। उसने सोचा — जब तक अगले मंगलवार भोग नहीं लगाऊँगी, तब तक कुछ नहीं खाऊँगी। छह दिन वह भूखी-प्यासी रही। अगले मंगलवार वह कमज़ोरी से बेहोश हो गई। उसकी अटूट निष्ठा देखकर हनुमान जी प्रकट हुए और उसे एक सुंदर बालक दिया। उन्होंने कहा, यह तुम्हारी सेवा करेगा। बालक का नाम मंगल रखा गया।

जब ब्राह्मण घर लौटा, तो बालक को देखकर उसके मन में शक आ गया। पत्नी ने सच बताया, पर उसे विश्वास नहीं हुआ। एक दिन वह बालक को कुएँ पर पानी भरने ले गया और उसे कुएँ में धकेल दिया। घर लौटा तो देखा, मंगल मुस्कुराता हुआ उसके पीछे-पीछे चला आ रहा है। ब्राह्मण हैरान रह गया।

उसी रात हनुमान जी ने ब्राह्मण को सपने में दर्शन दिए और कहा — यह बालक मैंने ही तुम्हें दिया है। तुम्हारी पत्नी पर शक करना गलत था। ब्राह्मण को अपनी भूल पर बहुत पछतावा हुआ। उसने पत्नी से क्षमा माँगी। उसके बाद पति-पत्नी दोनों मिलकर मंगलवार का व्रत करने लगे और प्रेम से रहने लगे।

आज के जीवन में सीख

शक रिश्तों को अंदर से खोखला कर देता है। जिस पर भरोसा है, उसकी बात सुनें — और गलती हो तो खुलकर माफ़ी माँगें।

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सभी अध्याय

  1. 1सोमवार व्रत कथा
  2. 2सोलह सोमवार व्रत कथा
  3. 3मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)
  4. 4बुधवार व्रत कथा
  5. 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
  6. 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
  7. 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
  8. 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
  9. 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
  10. 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
  11. 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
  12. 12प्रदोष व्रत कथा
  13. 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
  14. 14एकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म
  15. 15पूर्णिमा व्रत कथा
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  17. 17महाशिवरात्रि व्रत कथा
  18. 18शीतला अष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा
  19. 19नवरात्रि व्रत कथा
  20. 20वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
  21. 21निर्जला एकादशी व्रत कथा — भीमसेनी एकादशी
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  23. 23रक्षा बंधन की कथा
  24. 24जन्माष्टमी व्रत कथा
  25. 25हरतालिका तीज व्रत कथा
  26. 26गणेश चतुर्थी कथा — चंद्रमा और स्यमंतक मणि
  27. 27ऋषि पंचमी व्रत कथा
  28. 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
  29. 29अहोई अष्टमी व्रत कथा
  30. 30गोवर्धन पूजा की कथा
  31. 31छठ पूजा की कथा
  32. 32देव उठनी एकादशी की कथा
  33. 33तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी

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