साप्ताहिक व्रत · अध्याय 6
शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
अब तक की कहानी
शुक्रवार को संतोषी माता का व्रत रखा जाता है। यह कथा एक बहू के धैर्य और श्रद्धा की है।
परंपरा से संतोषी माता का व्रत लगातार सोलह शुक्रवार रखा जाता है। माता को गुड़ और भुने चने का भोग लगता है, कथा सुनी जाती है, और इस दिन व्रत करने वाला और घर के लोग नहीं खाते। व्रत पूरे होने पर उद्यापन में आठ बालकों को भोजन कराया जाता है, और उन्हें भी खटाई नहीं दी जाती।
एक बुढ़िया के सात बेटे थे। छह कमाते थे, सबसे छोटा कुछ नहीं करता था। माँ बड़े बेटों को अच्छा भोजन कराती और छोटे को उनकी थालियों का बचा हुआ देती। छोटे की पत्नी ने यह बात उसे दिखा दी। दुखी होकर वह परदेस चला गया। वहाँ एक सेठ के यहाँ मेहनत से काम करके वह धनी हो गया, पर घर और पत्नी को भूल गया।
इधर ससुराल में बहू से बहुत काम लिया जाता। उसे जंगल से लकड़ी लानी पड़ती और भूसे की रोटी और नारियल के खोल में पानी मिलता। एक दिन जंगल से लौटते समय उसने कुछ स्त्रियों को संतोषी माता का व्रत करते देखा। उन्होंने विधि बताई। बहू ने लकड़ी बेचकर गुड़-चना खरीदा और श्रद्धा से शुक्रवार का व्रत करने लगी।
कुछ समय में पति की चिट्ठी और पैसे आने लगे। बहू ने माता से कहा, मुझे पैसा नहीं, पति चाहिए। कथा के अनुसार माता ने उसके पति को सपने में घर की याद दिलाई। उसने अपना हिसाब निपटाया और ढेर सारा धन लेकर लौट आया। पति-पत्नी अलग घर में सुख से रहने लगे। फिर बहू ने उद्यापन किया, पर जेठानी ने अपने बेटों को सिखा दिया कि खटाई माँगना। बच्चों ने पैसे लेकर इमली खरीद ली। नियम टूट गया और पति पर संकट आ गया — राजा के सिपाही उसे पकड़ ले गए।
बहू ने माता से अपनी भूल की क्षमा माँगी और फिर से पूरे नियम से उद्यापन किया, इस बार ध्यान रखा कि किसी को खटाई न मिले। पति छूटकर घर आ गया। बाद में उनके घर पुत्र हुआ। घर वालों ने भी बहू के धैर्य और माता की महिमा को पहचाना और सब प्रेम से रहने लगे।
आज के जीवन में सीख
संतोषी माता का नाम ही संतोष है। कठिन समय में धैर्य रखना और छोटी-छोटी बातों में भी ईमानदारी से नियम निभाना असली ताक़त है।
सभी अध्याय
- 1सोमवार व्रत कथा
- 2सोलह सोमवार व्रत कथा
- 3मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)
- 4बुधवार व्रत कथा
- 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
- 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
- 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
- 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
- 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
- 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
- 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
- 12प्रदोष व्रत कथा
- 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
- 14एकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म
- 15पूर्णिमा व्रत कथा
- 16मकर संक्रांति की कथा
- 17महाशिवरात्रि व्रत कथा
- 18शीतला अष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा
- 19नवरात्रि व्रत कथा
- 20वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
- 21निर्जला एकादशी व्रत कथा — भीमसेनी एकादशी
- 22हरियाली तीज व्रत कथा
- 23रक्षा बंधन की कथा
- 24जन्माष्टमी व्रत कथा
- 25हरतालिका तीज व्रत कथा
- 26गणेश चतुर्थी कथा — चंद्रमा और स्यमंतक मणि
- 27ऋषि पंचमी व्रत कथा
- 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
- 29अहोई अष्टमी व्रत कथा
- 30गोवर्धन पूजा की कथा
- 31छठ पूजा की कथा
- 32देव उठनी एकादशी की कथा
- 33तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी