साप्ताहिक व्रत · अध्याय 5

गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा

पढ़ने का समय 5 मिनट

इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

गुरुवार देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु की पूजा का दिन माना जाता है। यह कथा एक दानी राजा और उसकी रानी की है।

परंपरा से गुरुवार का व्रत पीले रंग से जुड़ा है। भक्त पीले वस्त्र पहनते हैं, केले के पेड़ और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, चने की दाल, गुड़ और हल्दी चढ़ाते हैं, कथा सुनते हैं और दिन में एक बार बिना नमक का पीला भोजन करते हैं। कई लोग इस दिन बाल धोना और कपड़े धोना टालते हैं।

प्राचीन समय में एक राजा था जो बड़ा दानी था और हर गुरुवार व्रत रखता था। पर उसकी रानी को दान-पुण्य अच्छा नहीं लगता था। एक गुरुवार राजा शिकार पर गया था। तब एक साधु के वेश में भिक्षा माँगने आए। रानी बोली — महाराज, मैं इस दान-पुण्य से थक गई हूँ। कोई ऐसा उपाय बताइए कि यह सारा धन ही चला जाए, तो न दान करना पड़े।

साधु ने समझाया कि धन तो अच्छे कामों के लिए होता है। पर रानी नहीं मानी। तब साधु बोले — अगर यही चाहती हो, तो गुरुवार को घर लीपना, बाल धोना, कपड़े धोना और ऐसे ही काम करना जो इस दिन के नियम के विपरीत हैं। रानी ने वैसा ही किया। तीन गुरुवार में ही राज्य का सारा धन चला गया और घर में खाने तक को कुछ न बचा। राजा काम की खोज में परदेस चला गया।

रानी और उसकी दासी भूखी रहने लगीं। रानी ने दासी को अपनी धनी बहन के घर भेजा। उस दिन गुरुवार था, बहन कथा सुन रही थी, इसलिए उसने बीच में उत्तर नहीं दिया। दासी निराश लौट आई। कथा पूरी होने पर बहन स्वयं आई और कारण बताया। फिर उसने रानी को गुरुवार व्रत की सही विधि सिखाई — केले के पेड़ की पूजा, चने की दाल और गुड़ का भोग, और कथा।

रानी ने अपनी भूल समझी और श्रद्धा से व्रत करने लगी। धीरे-धीरे घर में फिर से अन्न और सुख लौटा। कथा के पूरे रूप में बताया गया है कि परदेस में राजा ने भी कठिनाइयाँ झेलीं और साधु के कहने पर व्रत किया। अंत में राजा घर लौटा। रानी अब दान से नहीं कतराती थी, और दोनों मिलकर धर्म से राज करने लगे।

आज के जीवन में सीख

धन का सही उपयोग बाँटने में है। रानी ने देखा कि जो दूसरों के काम आए, वही असली संपत्ति है।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 5 मिनटशुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा

सभी अध्याय

  1. 1सोमवार व्रत कथा
  2. 2सोलह सोमवार व्रत कथा
  3. 3मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)
  4. 4बुधवार व्रत कथा
  5. 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
  6. 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
  7. 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
  8. 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
  9. 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
  10. 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
  11. 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
  12. 12प्रदोष व्रत कथा
  13. 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
  14. 14एकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म
  15. 15पूर्णिमा व्रत कथा
  16. 16मकर संक्रांति की कथा
  17. 17महाशिवरात्रि व्रत कथा
  18. 18शीतला अष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा
  19. 19नवरात्रि व्रत कथा
  20. 20वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
  21. 21निर्जला एकादशी व्रत कथा — भीमसेनी एकादशी
  22. 22हरियाली तीज व्रत कथा
  23. 23रक्षा बंधन की कथा
  24. 24जन्माष्टमी व्रत कथा
  25. 25हरतालिका तीज व्रत कथा
  26. 26गणेश चतुर्थी कथा — चंद्रमा और स्यमंतक मणि
  27. 27ऋषि पंचमी व्रत कथा
  28. 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
  29. 29अहोई अष्टमी व्रत कथा
  30. 30गोवर्धन पूजा की कथा
  31. 31छठ पूजा की कथा
  32. 32देव उठनी एकादशी की कथा
  33. 33तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार