एकादश स्कंध · अध्याय 25
उद्धव गीता — कृष्ण का अंतिम उपदेश
अब तक की कहानी
कृष्ण ने धरती से दुष्ट राजाओं का बोझ हटा दिया है। अब उनके पृथ्वी से विदा होने का समय निकट आ रहा है।
यदुवंश बहुत शक्तिशाली हो गया था, और उसके कुछ युवक घमंडी भी। एक बार उन्होंने मज़ाक में कृष्ण के पुत्र सांब को स्त्री बनाकर ऋषियों से पूछा — इसके गर्भ से क्या होगा? ऋषियों ने श्राप दिया — एक मूसल, जो तुम्हारे कुल का नाश करेगा। कृष्ण समझ गए कि उनके जाने का समय आ गया है।
यह जानकर उद्धव जी व्याकुल हो गए। वे बोले — प्रभु, मुझे भी अपने साथ ले चलिए, मैं आपके बिना एक पल नहीं रह सकता। तब कृष्ण ने उन्हें प्यार से जो ज्ञान दिया, वह एकादश स्कंध में है और उसे कहते हैं।
कृष्ण ने एक अवधूत की कथा सुनाई, जिसने चौबीस गुरु बनाए थे। धरती से सहनशीलता सीखी, हवा से बिना चिपके सबको छूना, आकाश से सबमें रहकर भी अलग रहना, जल से पवित्र करना। मधुमक्खी से सीखा कि ज़रूरत भर लो और जमा मत करो, पतंगे से कि आकर्षण में अंधा होकर नष्ट न हों, और बच्चे से कि चिंता छोड़कर खुश रहो।
कृष्ण ने समझाया कि मन ही बंधन का कारण है और मन ही मुक्ति का। जो व्यक्ति अपने कर्तव्य निभाते हुए भी फल की चिंता नहीं करता, सबमें भगवान को देखता है और प्रेम से उनका नाम लेता है, वह संसार में रहते हुए भी मुक्त है। उन्होंने कहा कि सब साधनों में भक्ति सबसे सरल और सबसे ऊँची है।
अंत में कृष्ण ने उद्धव को बदरिकाश्रम जाकर इस ज्ञान में जीने को कहा और अपनी चरण-पादुकाएँ दीं। उद्धव भारी मन से गए। इसके बाद यदुवंश आपस में लड़कर समाप्त हो गया, बलराम योग से विदा हुए, और प्रभास क्षेत्र में एक पेड़ के नीचे बैठे कृष्ण अपने धाम लौट गए।
आज के जीवन में सीख
सीखने वाले के लिए सारी दुनिया गुरु है — धरती, पानी, एक छोटी मधुमक्खी भी। सबसे बड़ा काम अपने मन को समझना है।
सभी अध्याय
- 1व्यास जी की बेचैनी और नारद जी की सीख
- 2राजा परीक्षित का श्राप और शुकदेव जी का आगमन
- 3बालक ध्रुव की तपस्या
- 4भक्त प्रह्लाद
- 5नरसिंह अवतार
- 6गजेंद्र मोक्ष
- 7समुद्र मंथन और मोहिनी
- 8वामन अवतार और राजा बलि
- 9मत्स्य अवतार
- 10राजा अंबरीष और दुर्वासा ऋषि
- 11श्रीकृष्ण का जन्म
- 12पूतना का उद्धार
- 13माखन चोर और यशोदा को ब्रह्मांड दर्शन
- 14कालिय नाग का दमन
- 15गोवर्धन पर्वत उठाना
- 16शरद पूर्णिमा की रास लीला
- 17अक्रूर जी का आगमन और वृंदावन से विदाई
- 18मथुरा में कंस का अंत
- 19उद्धव जी और गोपियों का प्रेम
- 20जरासंध के आक्रमण और द्वारका का निर्माण
- 21रुक्मिणी जी का संदेश और विवाह
- 22स्यमंतक मणि की कथा
- 23जरासंध का अंत
- 24सुदामा और कृष्ण की मित्रता
- 25उद्धव गीता — कृष्ण का अंतिम उपदेश
- 26राजा परीक्षित की मुक्ति