द्वादश स्कंध · अध्याय 26

राजा परीक्षित की मुक्ति

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

सात दिनों तक शुकदेव जी ने परीक्षित को भगवान की सारी कथाएँ सुनाईं — ध्रुव, प्रह्लाद, अवतारों और श्रीकृष्ण की लीलाओं तक। अब सातवाँ दिन है।

कथा के अंत में शुकदेव जी ने परीक्षित से कहा — राजन, अब यह सोच छोड़ दो कि मैं मरूँगा। मरता केवल शरीर है, नहीं। जैसे घड़ा टूटने पर उसके भीतर का आकाश बड़े आकाश में मिल जाता है, वैसे ही तुम भगवान में ही हो। तक्षक तुम्हारे शरीर को छू सकता है, तुम्हें नहीं।

परीक्षित का मन पूरी तरह शांत हो गया। उन्होंने शुकदेव जी के चरणों में प्रणाम करके कहा — आपकी कृपा से मेरा अज्ञान और डर मिट गया। मैंने भगवान को पा लिया है। शुकदेव जी आशीर्वाद देकर वहाँ से चले गए।

उधर तक्षक नाग राजा को डसने चला। रास्ते में उसे कश्यप नाम के एक ब्राह्मण मिले, जो विष उतारने की विद्या जानते थे और राजा को बचाने जा रहे थे। तक्षक ने उन्हें बहुत धन देकर लौटा दिया। फिर वह वेश बदलकर राजा के पास पहुँचा और उन्हें डस लिया।

पर उस समय परीक्षित गंगा किनारे भगवान के ध्यान में लीन बैठे थे। विष की आग से उनका शरीर भस्म हो गया, पर वे पहले ही परमात्मा में मिल चुके थे। आकाश में देवताओं ने दुंदुभि बजाई और फूल बरसाए।

बाद में उनके पुत्र जनमेजय ने क्रोध में सर्प-यज्ञ किया, पर गुरु बृहस्पति के समझाने पर उसे रोक दिया। सूत जी, जिन्होंने यह पूरी कथा नैमिषारण्य के ऋषियों को सुनाई, अंत में कहते हैं — भागवत का सार भगवान का नाम है। उसका कीर्तन सब पापों को मिटाता है और उन्हें प्रणाम सब दुखों को शांत करता है।

नामसङ्कीर्तनं यस्य सर्वपापप्रणाशनम्। प्रणामो दुःखशमनस्तं नमामि हरिं परम्॥

जिनके नाम का कीर्तन सब पापों को नष्ट करता है और जिन्हें प्रणाम करने से सब दुख शांत हो जाते हैं, उन परम हरि को मैं नमस्कार करता हूँ।

— श्रीमद्भागवत 12.13.23 (अंतिम श्लोक)

आज के जीवन में सीख

मृत्यु का डर तब मिटता है जब हम जान लेते हैं कि हम शरीर से बड़े हैं। जीवन के आख़िरी सात दिन हों या सत्तर साल — उन्हें भगवान की याद में बिताना ही सबसे सुंदर तैयारी है।

सभी अध्याय

  1. 1व्यास जी की बेचैनी और नारद जी की सीख
  2. 2राजा परीक्षित का श्राप और शुकदेव जी का आगमन
  3. 3बालक ध्रुव की तपस्या
  4. 4भक्त प्रह्लाद
  5. 5नरसिंह अवतार
  6. 6गजेंद्र मोक्ष
  7. 7समुद्र मंथन और मोहिनी
  8. 8वामन अवतार और राजा बलि
  9. 9मत्स्य अवतार
  10. 10राजा अंबरीष और दुर्वासा ऋषि
  11. 11श्रीकृष्ण का जन्म
  12. 12पूतना का उद्धार
  13. 13माखन चोर और यशोदा को ब्रह्मांड दर्शन
  14. 14कालिय नाग का दमन
  15. 15गोवर्धन पर्वत उठाना
  16. 16शरद पूर्णिमा की रास लीला
  17. 17अक्रूर जी का आगमन और वृंदावन से विदाई
  18. 18मथुरा में कंस का अंत
  19. 19उद्धव जी और गोपियों का प्रेम
  20. 20जरासंध के आक्रमण और द्वारका का निर्माण
  21. 21रुक्मिणी जी का संदेश और विवाह
  22. 22स्यमंतक मणि की कथा
  23. 23जरासंध का अंत
  24. 24सुदामा और कृष्ण की मित्रता
  25. 25उद्धव गीता — कृष्ण का अंतिम उपदेश
  26. 26राजा परीक्षित की मुक्ति

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