अष्टम स्कंध · अध्याय 9
मत्स्य अवतार
अब तक की कहानी
वामन अवतार के बाद शुकदेव जी भगवान के पहले अवतार — मत्स्य — की कथा सुनाते हैं।
बहुत पहले सत्यव्रत नाम के एक धर्मात्मा राजा थे। एक दिन वे कृतमाला नदी में तर्पण कर रहे थे। उनकी अंजलि के जल में एक छोटी-सी मछली आ गई। मछली बोली — राजन, मुझे नदी में मत छोड़िए, बड़ी मछलियाँ मुझे खा जाएँगी। दयालु राजा उसे अपने कमंडल में रखकर ले आए।
रात भर में मछली इतनी बड़ी हो गई कि कमंडल छोटा पड़ गया। राजा ने उसे घड़े में रखा, फिर तालाब में, फिर सरोवर में — पर वह हर जगह और बड़ी हो जाती। आख़िर समुद्र में छोड़ा तो वह भी उसके लिए छोटा लगने लगा। राजा समझ गए — यह कोई साधारण मछली नहीं, स्वयं भगवान हैं।
भगवान ने कहा — आज से सातवें दिन आएगा और सारी धरती जल में डूब जाएगी। उस समय एक बड़ी नाव तुम्हारे पास आएगी। तुम सप्तर्षियों, सब तरह के बीजों और औषधियों को लेकर उसमें बैठ जाना। मैं मछली के रूप में आऊँगा; नाव को वासुकि नाग से मेरे सींग से बाँध देना।
ठीक वैसा ही हुआ। चारों ओर पानी ही पानी था। सत्यव्रत ने नाव को मत्स्य भगवान के सींग से बाँधा। प्रलय के लंबे समय में भगवान उन्हें आत्मा और परमात्मा का ज्ञान देते रहे। उसी समय भगवान ने हयग्रीव नाम के दैत्य को मारकर उन वेदों को भी वापस लाया, जो उसने ब्रह्मा जी से चुरा लिए थे।
प्रलय के बाद यही राजा सत्यव्रत वैवस्वत मनु बने, जिनसे आज की मानव-सृष्टि मानी जाती है। एक छोटी मछली पर दया करके राजा ने पूरी सृष्टि को बचाने का माध्यम बनने का सौभाग्य पाया।
आज के जीवन में सीख
छोटे से छोटे जीव पर की गई दया भी बहुत बड़े काम की शुरुआत बन सकती है।
सभी अध्याय
- 1व्यास जी की बेचैनी और नारद जी की सीख
- 2राजा परीक्षित का श्राप और शुकदेव जी का आगमन
- 3बालक ध्रुव की तपस्या
- 4भक्त प्रह्लाद
- 5नरसिंह अवतार
- 6गजेंद्र मोक्ष
- 7समुद्र मंथन और मोहिनी
- 8वामन अवतार और राजा बलि
- 9मत्स्य अवतार
- 10राजा अंबरीष और दुर्वासा ऋषि
- 11श्रीकृष्ण का जन्म
- 12पूतना का उद्धार
- 13माखन चोर और यशोदा को ब्रह्मांड दर्शन
- 14कालिय नाग का दमन
- 15गोवर्धन पर्वत उठाना
- 16शरद पूर्णिमा की रास लीला
- 17अक्रूर जी का आगमन और वृंदावन से विदाई
- 18मथुरा में कंस का अंत
- 19उद्धव जी और गोपियों का प्रेम
- 20जरासंध के आक्रमण और द्वारका का निर्माण
- 21रुक्मिणी जी का संदेश और विवाह
- 22स्यमंतक मणि की कथा
- 23जरासंध का अंत
- 24सुदामा और कृष्ण की मित्रता
- 25उद्धव गीता — कृष्ण का अंतिम उपदेश
- 26राजा परीक्षित की मुक्ति