चतुर्थ स्कंध · अध्याय 3

बालक ध्रुव की तपस्या

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अब तक की कहानी

शुकदेव जी परीक्षित को भगवान के भक्तों की कथाएँ सुना रहे हैं। पहली कथा एक पाँच साल के बालक की है।

राजा उत्तानपाद की दो रानियाँ थीं — सुनीति और सुरुचि। राजा छोटी रानी सुरुचि और उसके बेटे उत्तम को ज़्यादा प्यार करते थे। एक दिन उत्तम पिता की गोद में बैठा था। सुनीति का बेटा ध्रुव भी गोद में बैठना चाहता था। पर सुरुचि ने उसे झिड़क दिया — अगर पिता की गोद चाहिए तो भगवान की तपस्या करो और मेरे पेट से जन्म लो।

पाँच साल का ध्रुव रोता हुआ माँ के पास गया। सुनीति ने दुख सहकर भी किसी को बुरा नहीं कहा। उसने कहा — बेटा, किसी का बुरा मत सोचो। अगर तुम्हें सच्चा सहारा चाहिए, तो भगवान विष्णु की शरण लो। वही सबके पिता हैं। ध्रुव उसी समय वन की ओर निकल पड़ा।

रास्ते में नारद जी मिले। उन्होंने बालक को परखा — तुम अभी बहुत छोटे हो, घर लौट जाओ, तपस्या बहुत कठिन है। पर ध्रुव का निश्चय अटल था। तब नारद जी ने उसे यमुना किनारे मधुवन जाने को कहा और — ॐ नमो भगवते वासुदेवाय — का जाप सिखाया।

ध्रुव ने कठोर तपस्या शुरू की। पहले महीने वह फल खाता, फिर केवल पत्ते, फिर केवल जल, और फिर हवा पर ही रहने लगा। पाँचवें महीने वह एक पैर पर खड़ा होकर भगवान का ध्यान करने लगा। कहते हैं, उसकी साँस रुकने से तीनों लोकों की साँस रुकने लगी।

तब भगवान विष्णु गरुड़ पर सवार होकर प्रकट हुए। बालक को स्तुति करनी नहीं आती थी, तो भगवान ने अपने शंख से उसके गाल को छुआ और ध्रुव के मुख से सुंदर स्तुति निकल पड़ी। भगवान ने उसे लंबे समय तक राज्य और अंत में ऐसा अटल लोक दिया जो कभी नहीं हिलता। आज भी आकाश का ध्रुव तारा उसी की याद दिलाता है। ध्रुव ने बाद में कहा कि भगवान के सामने राज्य माँगना उसकी नासमझी थी।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

मैं भगवान वासुदेव (श्रीकृष्ण/विष्णु) को नमस्कार करता हूँ।

— नारद जी द्वारा ध्रुव को दिया गया मंत्र, चतुर्थ स्कंध

आज के जीवन में सीख

अपमान का जवाब बदले से नहीं, अपने आप को ऊँचा उठाकर दिया जा सकता है। पक्का इरादा उम्र नहीं देखता।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 5 मिनटभक्त प्रह्लाद

सभी अध्याय

  1. 1व्यास जी की बेचैनी और नारद जी की सीख
  2. 2राजा परीक्षित का श्राप और शुकदेव जी का आगमन
  3. 3बालक ध्रुव की तपस्या
  4. 4भक्त प्रह्लाद
  5. 5नरसिंह अवतार
  6. 6गजेंद्र मोक्ष
  7. 7समुद्र मंथन और मोहिनी
  8. 8वामन अवतार और राजा बलि
  9. 9मत्स्य अवतार
  10. 10राजा अंबरीष और दुर्वासा ऋषि
  11. 11श्रीकृष्ण का जन्म
  12. 12पूतना का उद्धार
  13. 13माखन चोर और यशोदा को ब्रह्मांड दर्शन
  14. 14कालिय नाग का दमन
  15. 15गोवर्धन पर्वत उठाना
  16. 16शरद पूर्णिमा की रास लीला
  17. 17अक्रूर जी का आगमन और वृंदावन से विदाई
  18. 18मथुरा में कंस का अंत
  19. 19उद्धव जी और गोपियों का प्रेम
  20. 20जरासंध के आक्रमण और द्वारका का निर्माण
  21. 21रुक्मिणी जी का संदेश और विवाह
  22. 22स्यमंतक मणि की कथा
  23. 23जरासंध का अंत
  24. 24सुदामा और कृष्ण की मित्रता
  25. 25उद्धव गीता — कृष्ण का अंतिम उपदेश
  26. 26राजा परीक्षित की मुक्ति

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