दशम स्कंध · अध्याय 22
स्यमंतक मणि की कथा
अब तक की कहानी
रुक्मिणी जी से विवाह के बाद कृष्ण द्वारका में रहते हैं। अब एक चमत्कारी मणि के कारण उन पर झूठा कलंक लगने वाला है।
द्वारका के एक यादव सत्राजित सूर्य देव के भक्त थे। सूर्य देव ने प्रसन्न होकर उन्हें स्यमंतक नाम की चमकती मणि दी, जिससे रोज़ बहुत सारा सोना निकलता था। जब सत्राजित उसे पहनकर नगर में आए तो लोगों को लगा जैसे स्वयं सूर्य आ गए हों। कृष्ण ने सुझाव दिया कि यह मणि राजा उग्रसेन को दे दो, ताकि सबका भला हो। पर सत्राजित ने मना कर दिया।
एक दिन सत्राजित का भाई प्रसेन वह मणि पहनकर शिकार पर गया। वन में एक सिंह ने उसे मार डाला और मणि ले ली। फिर रीछों के राजा जामवंत ने सिंह को मारा और मणि अपनी गुफा में ले जाकर बच्चे को खेलने दे दी। प्रसेन नहीं लौटा तो सत्राजित ने कहा — ज़रूर कृष्ण ने मणि के लिए मेरे भाई को मारा है।
यह मिटाने के लिए कृष्ण ख़ुद कुछ लोगों के साथ वन में खोज करने गए। उन्हें प्रसेन और घोड़े का शरीर मिला, फिर सिंह के निशान, फिर मरा हुआ सिंह। निशानों का पीछा करते हुए वे जामवंत की अँधेरी गुफा तक पहुँचे और अकेले अंदर गए।
जामवंत ने उन्हें पहचाना नहीं और दोनों में भयंकर युद्ध छिड़ गया। कहते हैं, यह युद्ध अट्ठाईस दिन चला। धीरे-धीरे जामवंत थकने लगे और समझ गए कि यह कोई साधारण योद्धा नहीं — ये तो उनके प्रभु श्रीराम ही हैं! उन्होंने चरणों में गिरकर क्षमा माँगी और आदर सहित मणि के साथ अपनी बेटी जांबवती का विवाह कृष्ण से कर दिया।
कृष्ण ने द्वारका लौटकर सबके सामने मणि सत्राजित को लौटा दी। सत्राजित बहुत लज्जित हुए और प्रायश्चित के रूप में अपनी बेटी सत्यभामा का विवाह कृष्ण से किया और मणि भी देनी चाही। कृष्ण ने सत्यभामा को स्वीकार किया, पर मणि सत्राजित के पास ही रहने दी। परंपरा में माना जाता है कि यह कथा सुनने से झूठे आरोप का भय दूर होता है।
आज के जीवन में सीख
झूठे आरोप पर ग़ुस्सा करने के बजाय सच सामने लाना बेहतर है। और जल्दबाज़ी में किसी पर दोष लगाना बाद में शर्मिंदगी देता है।
सभी अध्याय
- 1व्यास जी की बेचैनी और नारद जी की सीख
- 2राजा परीक्षित का श्राप और शुकदेव जी का आगमन
- 3बालक ध्रुव की तपस्या
- 4भक्त प्रह्लाद
- 5नरसिंह अवतार
- 6गजेंद्र मोक्ष
- 7समुद्र मंथन और मोहिनी
- 8वामन अवतार और राजा बलि
- 9मत्स्य अवतार
- 10राजा अंबरीष और दुर्वासा ऋषि
- 11श्रीकृष्ण का जन्म
- 12पूतना का उद्धार
- 13माखन चोर और यशोदा को ब्रह्मांड दर्शन
- 14कालिय नाग का दमन
- 15गोवर्धन पर्वत उठाना
- 16शरद पूर्णिमा की रास लीला
- 17अक्रूर जी का आगमन और वृंदावन से विदाई
- 18मथुरा में कंस का अंत
- 19उद्धव जी और गोपियों का प्रेम
- 20जरासंध के आक्रमण और द्वारका का निर्माण
- 21रुक्मिणी जी का संदेश और विवाह
- 22स्यमंतक मणि की कथा
- 23जरासंध का अंत
- 24सुदामा और कृष्ण की मित्रता
- 25उद्धव गीता — कृष्ण का अंतिम उपदेश
- 26राजा परीक्षित की मुक्ति