रुद्र संहिता · अध्याय 5
वीरभद्र और दक्ष के यज्ञ का विनाश
अब तक की कहानी
दक्ष ने अपने यज्ञ में शिव का अपमान किया। यह सहन न कर पाने पर सती ने योगाग्नि में अपना शरीर त्याग दिया।
सती के साथ गए गणों ने लौटकर कैलास पर सारी बात शिव को बताई। यह सुनते ही शांत रहने वाले महादेव का क्रोध जाग उठा। उन्होंने अपनी जटा से एक बाल उखाड़ा और ज़मीन पर पटक दिया।
उस जटा से एक भयंकर और विशाल वीर प्रकट हुआ — । उसकी अनेक भुजाएँ थीं और आँखें आग जैसी चमक रही थीं। साथ ही देवी का उग्र रूप महाकाली भी प्रकट हुईं। वीरभद्र ने हाथ जोड़कर पूछा — प्रभु, क्या आज्ञा है? शिव बोले — जाओ, दक्ष के यज्ञ का नाश कर दो।
वीरभद्र शिव के गणों की सेना लेकर कनखल पहुँचे। यज्ञ मंडप उखाड़ दिया गया, जो देवता दक्ष के अन्याय में साथ खड़े थे, उन्हें दंड मिला। अंत में वीरभद्र ने अहंकारी दक्ष का सिर काट दिया। जो यज्ञ अपमान के लिए रचा गया था, वह पूरा ही नहीं हो सका।
तब ब्रह्मा, विष्णु और सारे देवता कैलास पहुँचे और शिव से विनती की — प्रभु, क्रोध शांत कीजिए, यज्ञ अधूरा न रहे, दक्ष को क्षमा कर दीजिए। शिव का मन पिघल गया। वे स्वयं कनखल आए।
दक्ष के धड़ पर बकरे का सिर लगाया गया और वे जीवित हो उठे। अब उनका अहंकार पूरी तरह टूट चुका था। उन्होंने हाथ जोड़कर शिव की स्तुति की और यज्ञ में शिव को उनका भाग दिया। पर सती के जाने का दुख शिव के मन में रह गया, और वे गहरी समाधि में चले गए।
आज के जीवन में सीख
अन्याय के सामने चुप रहना भी गलत है, पर बड़प्पन इसमें है कि क्रोध के बाद क्षमा कर सकें। शिव दंड भी देते हैं और माफ़ भी करते हैं।
सभी अध्याय
- 1शिव पुराण क्या है?
- 2अनंत ज्योति स्तंभ — ब्रह्मा और विष्णु
- 3शिवलिंग की पूजा क्यों होती है?
- 4सती और दक्ष का यज्ञ
- 5वीरभद्र और दक्ष के यज्ञ का विनाश
- 6तारकासुर का वरदान और कामदेव का भस्म होना
- 7पार्वती की तपस्या
- 8शिव-पार्वती विवाह
- 9कार्तिकेय का जन्म और तारकासुर वध
- 10गणेश का जन्म और हाथी का सिर
- 11त्रिपुरासुर और एक बाण
- 12नीलकंठ — जब शिव ने विष पिया
- 13गंगा का अवतरण — शिव की जटा में
- 14मार्कंडेय और काल पर विजय
- 15किरात और अर्जुन
- 16शिव के रूप — अर्धनारीश्वर और नटराज
- 17शिकारी और पहली शिवरात्रि
- 18बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 1
- 19बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 2