रुद्र संहिता · अध्याय 6
तारकासुर का वरदान और कामदेव का भस्म होना
अब तक की कहानी
दक्ष का यज्ञ नष्ट हुआ और बाद में उन्हें क्षमा मिली। सती के वियोग में शिव गहरी समाधि में चले गए। सती ने हिमालय के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया।
सती ने पर्वतराज हिमालय और रानी मैना के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। नारद मुनि ने बताया कि यह कन्या शिव की पत्नी बनेगी। बड़ी होकर पार्वती हिमालय पर तप कर रहे शिव की सेवा करने लगीं, पर शिव ध्यान से आँख तक नहीं खोलते थे।
उसी समय तारकासुर नाम के असुर ने ब्रह्मा जी को तप से प्रसन्न कर वरदान ले लिया कि उसे केवल शिव का पुत्र ही मार सके। उसे लगा, समाधि में बैठे शिव कभी विवाह ही नहीं करेंगे। वरदान पाकर उसने स्वर्ग छीन लिया और देवताओं को बहुत सताया।
देवता ब्रह्मा जी के पास गए। उपाय यही था कि शिव का विवाह पार्वती से हो। इंद्र ने प्रेम के देवता को भेजा कि वे शिव के मन में पार्वती के लिए प्रेम जगाएँ। कामदेव अपनी पत्नी रति और वसंत ऋतु के साथ गए। पूरा वन अचानक फूलों से भर गया।
जब पार्वती पूजा के लिए आईं, कामदेव ने फूलों का बाण चला दिया। शिव का ध्यान एक पल को डोला। उन्होंने आँखें खोलीं और समझ गए कि यह किसी का खेल है। उन्होंने कामदेव को देखा और उनका तीसरा नेत्र खुल गया। उसकी अग्नि से कामदेव वहीं भस्म हो गए।
रति रोती हुई शिव के चरणों में गिर पड़ीं। शिव ने करुणा से कहा — कामदेव अब बिना शरीर के, बनकर, सबके मन में रहेंगे। और द्वापर युग में वे श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में फिर जन्म लेंगे, तब तुम उनसे मिलोगी। रति को धीरज मिला।
आज के जीवन में सीख
मन को भटकाने वाली चीज़ें बाहर से आती हैं, पर उन्हें जीतने की शक्ति हमारे भीतर है। और सबसे कठोर क्षण में भी करुणा रखी जा सकती है।
सभी अध्याय
- 1शिव पुराण क्या है?
- 2अनंत ज्योति स्तंभ — ब्रह्मा और विष्णु
- 3शिवलिंग की पूजा क्यों होती है?
- 4सती और दक्ष का यज्ञ
- 5वीरभद्र और दक्ष के यज्ञ का विनाश
- 6तारकासुर का वरदान और कामदेव का भस्म होना
- 7पार्वती की तपस्या
- 8शिव-पार्वती विवाह
- 9कार्तिकेय का जन्म और तारकासुर वध
- 10गणेश का जन्म और हाथी का सिर
- 11त्रिपुरासुर और एक बाण
- 12नीलकंठ — जब शिव ने विष पिया
- 13गंगा का अवतरण — शिव की जटा में
- 14मार्कंडेय और काल पर विजय
- 15किरात और अर्जुन
- 16शिव के रूप — अर्धनारीश्वर और नटराज
- 17शिकारी और पहली शिवरात्रि
- 18बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 1
- 19बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 2