रुद्र संहिता · अध्याय 9

कार्तिकेय का जन्म और तारकासुर वध

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अब तक की कहानी

शिव और पार्वती का विवाह धूमधाम से हुआ। अब देवताओं को उस पुत्र की प्रतीक्षा थी जो तारकासुर का अंत करेगा।

तारकासुर के अत्याचार बढ़ते जा रहे थे। देवता शिव के पुत्र की राह देख रहे थे। शिव पुराण बताता है कि शिव का दिव्य तेज इतना प्रचंड था कि उसे कोई सहन नहीं कर पा रहा था। पहले अग्नि देव ने उसे धारण किया, पर वे भी उसकी तपन से व्याकुल हो गए।

अग्नि ने वह तेज गंगा जी को सौंपा। गंगा ने उसे सरकंडों के एक वन, , में रख दिया। वहीं एक तेजस्वी बालक का जन्म हुआ, जिसकी चमक सूर्य जैसी थी। उसी समय छह कृत्तिकाएँ वहाँ स्नान करने आईं और बालक को देखकर उसे दूध पिलाने लगीं।

बालक ने छहों माताओं का दूध पीने के लिए छह मुख धारण कर लिए। इसलिए वे षडानन कहलाए, और कृत्तिकाओं के कारण उनका नाम कार्तिकेय पड़ा। उन्हें स्कंद और कुमार भी कहते हैं। बाद में शिव और पार्वती उन्हें प्रेम से कैलास ले आए।

देवताओं ने बालक कार्तिकेय को अपना बनाया। शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया और वे मोर पर सवार होकर, हाथ में शक्ति नाम का भाला लेकर, देव सेना के आगे चले। तारकासुर बालक को देखकर हँसा — यह बच्चा मुझसे लड़ेगा?

पर युद्ध शुरू होते ही उसकी हँसी गायब हो गई। घमासान युद्ध के बाद कार्तिकेय ने अपनी शक्ति से तारकासुर का अंत कर दिया। देवताओं को स्वर्ग वापस मिला और तीनों लोकों में फिर से शांति हुई। दक्षिण भारत में आज भी कार्तिकेय मुरुगन के नाम से बड़ी श्रद्धा से पूजे जाते हैं।

आज के जीवन में सीख

उम्र से किसी की क्षमता मत आँकिए। सही संस्कार और आशीर्वाद के साथ कम उम्र में भी बड़ा काम किया जा सकता है।

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सभी अध्याय

  1. 1शिव पुराण क्या है?
  2. 2अनंत ज्योति स्तंभ — ब्रह्मा और विष्णु
  3. 3शिवलिंग की पूजा क्यों होती है?
  4. 4सती और दक्ष का यज्ञ
  5. 5वीरभद्र और दक्ष के यज्ञ का विनाश
  6. 6तारकासुर का वरदान और कामदेव का भस्म होना
  7. 7पार्वती की तपस्या
  8. 8शिव-पार्वती विवाह
  9. 9कार्तिकेय का जन्म और तारकासुर वध
  10. 10गणेश का जन्म और हाथी का सिर
  11. 11त्रिपुरासुर और एक बाण
  12. 12नीलकंठ — जब शिव ने विष पिया
  13. 13गंगा का अवतरण — शिव की जटा में
  14. 14मार्कंडेय और काल पर विजय
  15. 15किरात और अर्जुन
  16. 16शिव के रूप — अर्धनारीश्वर और नटराज
  17. 17शिकारी और पहली शिवरात्रि
  18. 18बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 1
  19. 19बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 2

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