रुद्र संहिता · अध्याय 4
सती और दक्ष का यज्ञ
अब तक की कहानी
हमने जाना कि शिवलिंग शिव के अनंत रूप का प्रतीक है। अब रुद्र संहिता में शिव की पहली पत्नी सती की कथा शुरू होती है।
प्रजापति दक्ष ब्रह्मा जी के पुत्र थे और बहुत शक्तिशाली राजा थे। उनकी एक पुत्री थी सती, जो बचपन से ही शिव की भक्ति करती थीं। सती ने कठोर तप किया और शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। दोनों कैलास पर्वत पर सुख से रहने लगे।
पर दक्ष को शिव पसंद नहीं थे। उन्हें लगता था कि भस्म लगाने वाले, श्मशान में घूमने वाले, भूत-गणों के साथ रहने वाले शिव उनके दामाद के योग्य नहीं। एक बार प्रयाग की एक सभा में दक्ष आए तो सब देवता खड़े हो गए, पर शिव ध्यान में बैठे रहे। दक्ष ने इसे अपना अपमान समझा और मन में बैर बाँध लिया।
बदला लेने के लिए दक्ष ने कनखल में एक विशाल किया। सारे देवता, ऋषि और राजा बुलाए गए — बस शिव और सती को नहीं। जब सती ने आकाश में देवताओं को सज-धजकर जाते देखा, तो उनका मन मायके जाने को मचल उठा।
शिव ने समझाया — बिना बुलाए जाना ठीक नहीं, वहाँ तुम्हारा अपमान होगा। पर सती ने सोचा, पिता का घर है, बुलावे की क्या ज़रूरत। वे नंदी और कुछ गणों के साथ यज्ञ में पहुँचीं। वहाँ पिता ने उनसे ठीक से बात तक नहीं की, और यज्ञ में शिव का भाग रखा ही नहीं गया था।
जब दक्ष ने सबके सामने शिव का अपमान किया, तो सती यह सहन न कर सकीं। उन्होंने कहा — जिस शरीर का संबंध शिव का अपमान करने वाले से है, वह मुझे नहीं चाहिए। उन्होंने योग की अग्नि से अपना शरीर त्याग दिया। पूरी सभा सन्न रह गई। यज्ञ मंडप में हाहाकार मच गया।
आज के जीवन में सीख
अहंकार रिश्तों को भी जला देता है। और जहाँ किसी अपने का सम्मान न हो, वहाँ आत्मसम्मान के साथ खड़े रहना भी धर्म है।
सभी अध्याय
- 1शिव पुराण क्या है?
- 2अनंत ज्योति स्तंभ — ब्रह्मा और विष्णु
- 3शिवलिंग की पूजा क्यों होती है?
- 4सती और दक्ष का यज्ञ
- 5वीरभद्र और दक्ष के यज्ञ का विनाश
- 6तारकासुर का वरदान और कामदेव का भस्म होना
- 7पार्वती की तपस्या
- 8शिव-पार्वती विवाह
- 9कार्तिकेय का जन्म और तारकासुर वध
- 10गणेश का जन्म और हाथी का सिर
- 11त्रिपुरासुर और एक बाण
- 12नीलकंठ — जब शिव ने विष पिया
- 13गंगा का अवतरण — शिव की जटा में
- 14मार्कंडेय और काल पर विजय
- 15किरात और अर्जुन
- 16शिव के रूप — अर्धनारीश्वर और नटराज
- 17शिकारी और पहली शिवरात्रि
- 18बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 1
- 19बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 2