रुद्र संहिता · अध्याय 8
शिव-पार्वती विवाह
अब तक की कहानी
पार्वती के कठोर तप से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वचन दिया।
शिव ने सप्तर्षियों को हिमालय के पास विवाह का प्रस्ताव लेकर भेजा। हिमालय और मैना ने खुशी से स्वीकार किया। शुभ मुहूर्त तय हुआ और पूरे हिमालय नगर को सजाया जाने लगा। देवता, ऋषि, गंधर्व — सब इस विवाह को देखने उमड़ पड़े।
फिर आई शिव की । आगे ब्रह्मा, विष्णु और देवता सुंदर वेश में थे। पर पीछे शिव के गण — भूत, प्रेत, बेताल — कोई बिना सिर का, कोई अनेक आँखों वाला, नाचते-गाते चल रहे थे। बीच में बैल पर बैठे शिव, शरीर पर भस्म, गले में साँप, सिर पर जटा।
मैना दूल्हे को देखने उत्सुकता से महल की छत पर आईं। जब उन्होंने शिव का यह रूप देखा, तो डर और दुख से बेहोश हो गईं। होश आने पर बोलीं — मैं अपनी कोमल बेटी इस वेश वाले से नहीं ब्याहूँगी। नारद जी और देवताओं ने बहुत समझाया, पर वे नहीं मानीं।
तब पार्वती की विनती पर और विष्णु जी के कहने पर शिव ने अपना अत्यंत सुंदर रूप धारण किया — करोड़ों कामदेवों से भी सुंदर, माथे पर चंद्रमा, दिव्य वस्त्र और आभूषण। मैना देखती रह गईं। उनकी आँखों में आँसू आ गए और उन्होंने हाथ जोड़कर शिव का स्वागत किया।
वैदिक मंत्रों के साथ शिव और पार्वती का विवाह हुआ। हिमालय ने किया। तीनों लोकों में आनंद छा गया। परंपरा में यह विवाह शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है, और कई जगह महाशिवरात्रि को इसी विवाह के उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
जो कपूर के समान गोरे हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार का सार हैं, नागराज को हार बनाकर पहनते हैं और सदा हृदय-कमल में बसते हैं — उन भवानी सहित भगवान शिव को मैं नमन करता हूँ।
— प्रचलित शिव स्तुति (आरती के बाद गाई जाती है)
आज के जीवन में सीख
किसी को उसके बाहरी रूप से मत आँकिए। जो बाहर से अजीब लगे, उसके भीतर सबसे सुंदर मन हो सकता है।
सभी अध्याय
- 1शिव पुराण क्या है?
- 2अनंत ज्योति स्तंभ — ब्रह्मा और विष्णु
- 3शिवलिंग की पूजा क्यों होती है?
- 4सती और दक्ष का यज्ञ
- 5वीरभद्र और दक्ष के यज्ञ का विनाश
- 6तारकासुर का वरदान और कामदेव का भस्म होना
- 7पार्वती की तपस्या
- 8शिव-पार्वती विवाह
- 9कार्तिकेय का जन्म और तारकासुर वध
- 10गणेश का जन्म और हाथी का सिर
- 11त्रिपुरासुर और एक बाण
- 12नीलकंठ — जब शिव ने विष पिया
- 13गंगा का अवतरण — शिव की जटा में
- 14मार्कंडेय और काल पर विजय
- 15किरात और अर्जुन
- 16शिव के रूप — अर्धनारीश्वर और नटराज
- 17शिकारी और पहली शिवरात्रि
- 18बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 1
- 19बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 2