कोटिरुद्र संहिता · अध्याय 18

बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 1

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शिकारी की कथा ने शिवरात्रि की महिमा बताई। कोटिरुद्र संहिता उन बारह स्थानों की कथा भी कहती है जहाँ शिव ज्योति रूप में बसे — ज्योतिर्लिंग।

सोमनाथ (गुजरात) — चंद्रमा का विवाह दक्ष की सत्ताईस पुत्रियों से हुआ, पर वे केवल रोहिणी से प्रेम करते थे। दुखी होकर दक्ष ने उन्हें क्षीण होने का श्राप दिया। चंद्रमा ने प्रभास क्षेत्र में शिव की तपस्या की। शिव ने श्राप को संतुलित किया — पंद्रह दिन घटोगे, पंद्रह दिन बढ़ोगे। सोम यानी चंद्रमा के नाथ होने से यह सोमनाथ कहलाया।

मल्लिकार्जुन (श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश) — जब गणेश का विवाह पहले हो गया, तो कार्तिकेय रूठकर क्रौंच पर्वत पर चले गए। पुत्र से मिलने शिव और पार्वती भी वहाँ गए और ज्योति रूप में बस गए। मल्लिका यानी पार्वती और अर्जुन यानी शिव — इसलिए यह मल्लिकार्जुन है।

महाकालेश्वर (उज्जैन, मध्य प्रदेश) — उज्जैन में शिवभक्त ब्राह्मण परिवार रहता था। दूषण नाम का असुर उन्हें सताने आया। तभी धरती फाड़कर शिव रूप में प्रकट हुए और असुर का अंत किया। भक्तों की विनती पर वे वहीं बस गए। यहाँ की भस्म आरती आज भी प्रसिद्ध है।

ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश) — नर्मदा के बीच एक द्वीप है, जिसका आकार ॐ जैसा माना जाता है। विंध्य पर्वत ने यहाँ शिव की तपस्या की। शिव प्रसन्न होकर यहाँ प्रकट हुए। परंपरा में यहाँ ओंकारेश्वर और अमलेश्वर, दोनों की पूजा होती है।

केदारनाथ (उत्तराखंड) — हिमालय में नर और नारायण नाम के दो ऋषि पार्थिव शिवलिंग बनाकर शिव की पूजा करते थे। शिव प्रसन्न हुए, और उनकी विनती पर केदार क्षेत्र में सदा के लिए बस गए। एक अन्य लोकप्रिय परंपरा इस स्थान को पांडवों से भी जोड़ती है।

भीमाशंकर (महाराष्ट्र) — कुंभकर्ण का पुत्र भीम, पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए वरदान पाकर सबको सताने लगा। उसने शिवभक्त राजा सुदक्षिण को कैद कर लिया। जब उसने राजा के पर तलवार चलाई, तो शिव प्रकट हुए और उसका अंत किया। वे वहीं भीमाशंकर नाम से बस गए।

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥

सौराष्ट्र में सोमनाथ, श्रीशैल पर मल्लिकार्जुन, उज्जैन में महाकाल, और ओंकारेश्वर व अमलेश्वर।

— द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र

आज के जीवन में सीख

हर ज्योतिर्लिंग की कथा में शिव किसी भक्त की पुकार पर आते हैं। सच्ची पुकार कहीं से भी की जाए, सुनी जाती है।

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सभी अध्याय

  1. 1शिव पुराण क्या है?
  2. 2अनंत ज्योति स्तंभ — ब्रह्मा और विष्णु
  3. 3शिवलिंग की पूजा क्यों होती है?
  4. 4सती और दक्ष का यज्ञ
  5. 5वीरभद्र और दक्ष के यज्ञ का विनाश
  6. 6तारकासुर का वरदान और कामदेव का भस्म होना
  7. 7पार्वती की तपस्या
  8. 8शिव-पार्वती विवाह
  9. 9कार्तिकेय का जन्म और तारकासुर वध
  10. 10गणेश का जन्म और हाथी का सिर
  11. 11त्रिपुरासुर और एक बाण
  12. 12नीलकंठ — जब शिव ने विष पिया
  13. 13गंगा का अवतरण — शिव की जटा में
  14. 14मार्कंडेय और काल पर विजय
  15. 15किरात और अर्जुन
  16. 16शिव के रूप — अर्धनारीश्वर और नटराज
  17. 17शिकारी और पहली शिवरात्रि
  18. 18बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 1
  19. 19बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 2

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