शिव महिमा · अध्याय 13
गंगा का अवतरण — शिव की जटा में
अब तक की कहानी
शिव ने हलाहल विष पीकर संसार को बचाया और नीलकंठ कहलाए। अब कथा उस दिन की, जब स्वर्ग की गंगा धरती पर आईं।
अयोध्या के राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया। यज्ञ का घोड़ा खो गया। राजा के साठ हज़ार पुत्र उसे खोजते हुए कपिल मुनि के आश्रम पहुँचे, जहाँ घोड़ा बँधा था। उन्होंने ध्यान में बैठे मुनि को चोर समझकर उनका अपमान किया। मुनि ने आँखें खोलीं और उनके तेज से सब भस्म हो गए।
उन पुत्रों की मुक्ति केवल स्वर्ग की पवित्र गंगा के जल से हो सकती थी। सगर के पोते अंशुमान और फिर दिलीप ने बहुत प्रयास किए, पर सफल न हुए। अंत में राजा ने अपना राज्य छोड़कर हिमालय पर कठोर तप किया। ब्रह्मा जी प्रसन्न हुए और गंगा को धरती पर भेजने को तैयार हो गए।
पर एक समस्या थी। गंगा का वेग इतना प्रचंड था कि वे सीधे धरती पर गिरतीं तो धरती फट जाती। ब्रह्मा जी ने कहा — इस वेग को केवल शिव संभाल सकते हैं। भगीरथ ने फिर शिव की आराधना की। भोलेनाथ प्रसन्न हुए और गंगा को धारण करने के लिए तैयार हो गए।
गंगा को अपने वेग पर गर्व था। उन्होंने सोचा, मैं शिव को भी बहा ले जाऊँगी। पर जैसे ही वे आकाश से उतरीं, शिव ने उन्हें अपनी में समेट लिया। गंगा उन घनी जटाओं में ऐसी उलझीं कि बाहर निकलने का रास्ता ही न मिला। उनका गर्व शांत हो गया।
भगीरथ की प्रार्थना पर शिव ने अपनी जटा से गंगा की एक धारा धीरे से छोड़ी। आगे-आगे भगीरथ का रथ चला और पीछे-पीछे गंगा। वे कपिल मुनि के आश्रम तक पहुँचीं और सगर के पुत्रों को मुक्ति मिली। भगीरथ के कारण गंगा भागीरथी कहलाईं, और शिव गंगाधर।
आज के जीवन में सीख
भगीरथ जैसा प्रयास — जो पीढ़ियों से अधूरा काम पूरा कर दे — आज भी मिसाल है। और शक्ति तभी उपयोगी है जब उसे संयम से दिशा दी जाए।
सभी अध्याय
- 1शिव पुराण क्या है?
- 2अनंत ज्योति स्तंभ — ब्रह्मा और विष्णु
- 3शिवलिंग की पूजा क्यों होती है?
- 4सती और दक्ष का यज्ञ
- 5वीरभद्र और दक्ष के यज्ञ का विनाश
- 6तारकासुर का वरदान और कामदेव का भस्म होना
- 7पार्वती की तपस्या
- 8शिव-पार्वती विवाह
- 9कार्तिकेय का जन्म और तारकासुर वध
- 10गणेश का जन्म और हाथी का सिर
- 11त्रिपुरासुर और एक बाण
- 12नीलकंठ — जब शिव ने विष पिया
- 13गंगा का अवतरण — शिव की जटा में
- 14मार्कंडेय और काल पर विजय
- 15किरात और अर्जुन
- 16शिव के रूप — अर्धनारीश्वर और नटराज
- 17शिकारी और पहली शिवरात्रि
- 18बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 1
- 19बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 2