शिव महिमा · अध्याय 14

मार्कंडेय और काल पर विजय

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अब तक की कहानी

शिव ने गंगा को अपनी जटा में धारण किया और भगीरथ का तप सफल हुआ। अब एक बालक भक्त की कथा, जिसके लिए शिव मृत्यु से भी टकरा गए।

मृकंडु ऋषि और उनकी पत्नी मरुद्वती की कोई संतान नहीं थी। उन्होंने शिव की तपस्या की। शिव प्रकट हुए और एक कठिन विकल्प दिया — क्या तुम्हें लंबी उम्र वाला पर साधारण पुत्र चाहिए, या बहुत गुणवान पुत्र जिसकी आयु केवल सोलह वर्ष होगी? दोनों ने गुणवान पुत्र को चुना।

बालक का नाम रखा गया मार्कंडेय। वह बहुत बुद्धिमान और शिव का परम भक्त था। जैसे-जैसे सोलहवाँ वर्ष पास आया, माता-पिता उदास रहने लगे। कारण जानकर मार्कंडेय बोले — आप चिंता न करें, मैं शिव की शरण में रहूँगा। वे दिन-रात शिवलिंग की पूजा में लीन हो गए।

निश्चित दिन स्वयं आए। उन्होंने अपना पाश फेंका। मार्कंडेय ने दोनों बाँहों से शिवलिंग को कसकर पकड़ लिया। पाश बालक के साथ शिवलिंग पर भी जा गिरा। उसी क्षण शिवलिंग से शिव प्रकट हुए — उनका रूप क्रोध से जल रहा था।

शिव ने कहा — मेरी शरण में आए भक्त को कोई नहीं छू सकता। उन्होंने यमराज पर प्रहार किया और उन्हें पीछे हटा दिया। इसीलिए शिव को कालांतक और कहते हैं — मृत्यु को जीतने वाले। बाद में देवताओं की विनती पर शिव ने यमराज को फिर से उनका कार्य सौंप दिया, ताकि सृष्टि का नियम चलता रहे।

शिव ने मार्कंडेय को वरदान दिया कि वे सदा सोलह वर्ष के रहेंगे और चिरंजीवी होंगे। परंपरा में महामृत्युंजय मंत्र को इस कथा से जोड़ा जाता है, और भक्त कठिन समय में धैर्य और साहस के लिए इसका जाप करते हैं।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

हम तीन नेत्रों वाले शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सबका पोषण करते हैं। जैसे पका हुआ फल डाल से अपने-आप छूट जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु के बंधन से छुड़ाएँ, अमरता से नहीं।

— महामृत्युंजय मंत्र, ऋग्वेद 7.59.12

आज के जीवन में सीख

डर के सामने हिम्मत हारने के बजाय मार्कंडेय ने अपनी श्रद्धा को और कसकर पकड़ लिया। कठिन समय में भरोसा ही सबसे बड़ा सहारा है।

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सभी अध्याय

  1. 1शिव पुराण क्या है?
  2. 2अनंत ज्योति स्तंभ — ब्रह्मा और विष्णु
  3. 3शिवलिंग की पूजा क्यों होती है?
  4. 4सती और दक्ष का यज्ञ
  5. 5वीरभद्र और दक्ष के यज्ञ का विनाश
  6. 6तारकासुर का वरदान और कामदेव का भस्म होना
  7. 7पार्वती की तपस्या
  8. 8शिव-पार्वती विवाह
  9. 9कार्तिकेय का जन्म और तारकासुर वध
  10. 10गणेश का जन्म और हाथी का सिर
  11. 11त्रिपुरासुर और एक बाण
  12. 12नीलकंठ — जब शिव ने विष पिया
  13. 13गंगा का अवतरण — शिव की जटा में
  14. 14मार्कंडेय और काल पर विजय
  15. 15किरात और अर्जुन
  16. 16शिव के रूप — अर्धनारीश्वर और नटराज
  17. 17शिकारी और पहली शिवरात्रि
  18. 18बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 1
  19. 19बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 2

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