नवार्ण मंत्र — अर्थ और जप विधि
नवार्ण मंत्र माँ दुर्गा का प्रमुख मंत्र है, जिसका जप दुर्गा सप्तशती पाठ के साथ किया जाता है। 'नवार्ण' यानी नौ अक्षरों वाला। इसके तीन बीज अक्षर — ऐं, ह्रीं, क्लीं — परंपरा में महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली से जोड़े जाते हैं। नवरात्रि में इसका विशेष जप होता है।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
अर्थ
मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
ऐं (ज्ञान), ह्रीं (शक्ति और ऐश्वर्य) और क्लीं (आकर्षण और कर्म) के बीज अक्षरों के साथ माँ चामुंडा को प्रणाम है। 'विच्चे' की परंपरागत व्याख्या है — हे देवी, हमें अज्ञान के बंधन से मुक्त करें।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवार्ण मंत्र कितनी बार जपें?
सामान्यतः 108 बार (एक माला) रोज़। नवरात्रि में कई भक्त प्रतिदिन कई मालाएँ जपते हैं।
नवार्ण मंत्र का जप कब करें?
नवरात्रि के नौ दिनों में, दुर्गा सप्तशती पाठ से पहले और बाद में, या रोज़ सुबह-शाम। परंपरा में इसे गुरु से लेकर जपना अच्छा माना जाता है।
इसे नवार्ण क्यों कहते हैं?
'नव' यानी नौ और 'अर्ण' यानी अक्षर। ॐ के बाद ऐं-ह्रीं-क्लीं-चा-मु-ण्डा-यै-वि-च्चे — ये नौ अक्षर इस मंत्र को बनाते हैं।