जय वैष्णवी माता आरती — अर्थ सहित

माता वैष्णो देवी का पवित्र धाम जम्मू के त्रिकूट पर्वत पर एक गुफा में है। यह आरती उसी सुंदर गुफा, ऊँचे पर्वत, लहराते झंडों और घंटों की आवाज़ का वर्णन करती है। अंतिम पंक्ति में भक्त ध्यानू का नाम आता है। नवरात्रि में और यात्रा से पहले-बाद घरों में यह आरती गाई जाती है।

8 पद · लगभग 4 मिनट

जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता। हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता॥

शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी। गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी॥

ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे। सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे॥

सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे। बार-बार देखन को, ऐ माँ मन चावे॥

भवन पे झण्डे झूलें, घंटा ध्वनि बाजे। ऊँचा पर्वत तेरा, माता प्रिय लागे॥

पान सुपारी ध्वजा नारियल, भेंट पुष्प मेवा। दास खड़े चरणों में, दर्शन दो देवा॥

जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे। उसकी इच्छा पूरण, माता हो जावे॥

इतनी स्तुति निश-दिन, जो नर भी गावे। कहते सेवक ध्यानू, सुख सम्पत्ति पावे॥

इसके बाद पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैष्णो माता कौन हैं?

माता वैष्णो देवी को महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती — तीनों शक्तियों का रूप माना जाता है। उनका धाम जम्मू-कश्मीर में त्रिकूट पर्वत की गुफा में है।

ध्यानू भगत कौन थे?

ध्यानू भगत माता के प्रसिद्ध भक्त माने जाते हैं, जिनकी भक्ति की कथा पहाड़ी इलाकों में बहुत प्रचलित है। आरती की अंतिम पंक्ति में उनका नाम आता है।

वैष्णो माता की आरती कब गाएँ?

नवरात्रि के दिनों में, माता की चौकी या जागरण में, और रोज़ की देवी पूजा के अंत में।

इस बारे में कुछ पूछें

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार