जय अम्बे गौरी आरती — अर्थ सहित

'जय अम्बे गौरी' माँ दुर्गा की सबसे प्रसिद्ध आरती है। इसमें माँ के रूप, उनके वाहन सिंह और शुंभ-निशुंभ, महिषासुर जैसे असुरों पर उनकी विजय का वर्णन है। अंतिम पद में शिवानंद स्वामी का नाम आता है। नवरात्रि में सुबह-शाम यह आरती हर घर और पंडाल में गूँजती है।

14 पद · लगभग 6 मिनट

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपत्ति पावे॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा जी की आरती कब करनी चाहिए?

रोज़ सुबह-शाम देवी पूजा के अंत में, और विशेष रूप से नवरात्रि के नौ दिनों में। कई घरों में शुक्रवार और अष्टमी को भी यह आरती की जाती है।

'जय अम्बे गौरी' किसने लिखी?

अंतिम पद में 'कहत शिवानंद स्वामी' आता है, इसलिए परंपरा से इसे शिवानंद स्वामी की रचना माना जाता है।

नवरात्रि में दिन में कितनी बार आरती करें?

परंपरा से सुबह और शाम, दो बार आरती की जाती है। अखंड ज्योति जलाने वाले घरों में दोनों समय नियम से आरती करते हैं।

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