नवरात्रि व्रत कथा — नौ देवियों की कहानी अर्थ सहित
नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है — चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ — पर चैत्र और आश्विन नवरात्रि सबसे प्रसिद्ध हैं। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। यह कथा महिषासुर दैत्य के अत्याचार और देवी के महिषासुर मर्दिनी रूप में उसके वध की कहानी है।
॥ दोहा ॥
जय माँ दुर्गे जगत माँ, नौ रूपों की देवी। नवरात्रि जो व्रत करे, माँ करे उद्धार।
प्राचीन काल में महिषासुर नाम का राक्षस था। ब्रह्मा का वरदान पाकर अजेय हो गया था। देवताओं को स्वर्ग से खदेड़ दिया। देवगण विष्णु-शिव के पास सहायता माँगने गए।
त्रिदेवों और देवताओं की शक्ति से, महाशक्ति माँ दुर्गा प्रकट हुईं। अठारह भुजाओं वाली देवी का रूप, सिंह पर सवार, महिषासुर का वध करने आईं।
नौ दिन तक युद्ध हुआ देवी और दानव में। शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा — तीन रूप। कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी — तीन और। कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री — नौ देवी।
दसवें दिन — विजयादशमी — महिषासुर मारा गया। देवताओं ने जय-जयकार किया, स्वर्ग वापस मिला। माँ दुर्गा ने कहा — नवरात्रि में मेरी पूजा करो। जो व्रत रखे, उसे संतान, सुख और विजय मिले।
नवरात्रि में कलश स्थापना से शुरुआत होती। नौ देवियों की नौ दिन पूजा होती। दुर्गा सप्तशती का पाठ, अखंड ज्योत। नवमी को कन्या-पूजन, दसमी को विसर्जन।
॥ दोहा ॥
माँ दुर्गा की जय हो, नवरात्रि शुभ काल। नौ रूपों की भक्ति से, मिटे हर जंजाल॥
अर्थ
दोहा
जय माँ दुर्गे जगत माँ, नौ रूपों की देवी। नवरात्रि जो व्रत करे, माँ करे उद्धार।
हे माँ दुर्गे, जगत की माँ, नौ रूपों वाली देवी, आपकी जय हो। जो नवरात्रि का व्रत रखे, माँ उसका उद्धार करें।
पद 1
प्राचीन काल में महिषासुर नाम का राक्षस था। ब्रह्मा का वरदान पाकर अजेय हो गया था। देवताओं को स्वर्ग से खदेड़ दिया। देवगण विष्णु-शिव के पास सहायता माँगने गए।
प्राचीन काल में महिषासुर नाम का राक्षस था जो ब्रह्मा के वरदान से अजेय हो गया था। उसने देवताओं को स्वर्ग से खदेड़ दिया। देवगण विष्णु और शिव के पास सहायता माँगने गए।
पद 2
त्रिदेवों और देवताओं की शक्ति से, महाशक्ति माँ दुर्गा प्रकट हुईं। अठारह भुजाओं वाली देवी का रूप, सिंह पर सवार, महिषासुर का वध करने आईं।
त्रिदेवों और देवताओं की सम्मिलित शक्ति से महाशक्ति माँ दुर्गा प्रकट हुईं। अठारह भुजाओं वाली देवी सिंह पर सवार होकर महिषासुर का वध करने आईं।
पद 3
नौ दिन तक युद्ध हुआ देवी और दानव में। शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा — तीन रूप। कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी — तीन और। कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री — नौ देवी।
नौ दिन तक देवी और दानव में युद्ध हुआ। नौ रूप थे — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री।
पद 4
दसवें दिन — विजयादशमी — महिषासुर मारा गया। देवताओं ने जय-जयकार किया, स्वर्ग वापस मिला। माँ दुर्गा ने कहा — नवरात्रि में मेरी पूजा करो। जो व्रत रखे, उसे संतान, सुख और विजय मिले।
दसवें दिन — विजयादशमी पर — महिषासुर मारा गया। देवताओं ने जय-जयकार किया, स्वर्ग वापस मिला। माँ दुर्गा ने कहा — नवरात्रि में मेरी पूजा करो; जो व्रत रखे उसे संतान, सुख और विजय मिले।
पद 5
नवरात्रि में कलश स्थापना से शुरुआत होती। नौ देवियों की नौ दिन पूजा होती। दुर्गा सप्तशती का पाठ, अखंड ज्योत। नवमी को कन्या-पूजन, दसमी को विसर्जन।
नवरात्रि में कलश स्थापना से शुरुआत होती है। नौ देवियों की नौ दिन पूजा होती है। दुर्गा सप्तशती का पाठ और अखंड ज्योत जलाई जाती है। नवमी को कन्या-पूजन और दसमी को विसर्जन होता है।
दोहा
माँ दुर्गा की जय हो, नवरात्रि शुभ काल। नौ रूपों की भक्ति से, मिटे हर जंजाल॥
माँ दुर्गा की जय हो। नवरात्रि शुभ काल है। नौ रूपों की भक्ति से हर बंधन और कष्ट मिट जाता है।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवरात्रि व्रत में क्या खाएँ?
नवरात्रि व्रत में कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, आलू, शकरकंद, फल, दूध, मखाना और सेंधा नमक का प्रयोग करें। अनाज, प्याज, लहसुन, नमक और मांस-मदिरा वर्जित हैं। कुछ लोग केवल फलाहार करते हैं।
नवरात्रि में कन्या पूजन क्यों और कब करें?
कन्या पूजन नवमी को होता है। दो से दस साल की नौ कन्याओं को माँ दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक मानकर पूजा जाता है। उन्हें भोजन, वस्त्र और दक्षिणा दी जाती है। यह पूजन व्रत के उद्यापन का हिस्सा है और इससे माता की विशेष कृपा मिलती है।
नवरात्रि की अखंड ज्योत कैसे रखें?
घी या तिल के तेल की ज्योत जलाएँ। दीपक ऐसी जगह रखें जहाँ हवा न लगे। नौ दिन तक बुझने न दें — कोई न कोई घर में रहे। ज्योत के पास जल, फूल और बेलपत्र रखें। ज्योत बुझने पर तुरंत फिर जलाएँ और मन में माफी माँगें।