प्रेत खंड · अध्याय 4
शरीर छोड़ने के बाद आत्मा
अब तक की कहानी
भगवान विष्णु ने बताया कि मृत्यु के समय आत्मा शरीर छोड़ देती है, और उस समय भगवान का नाम सबसे बड़ा सहारा है।
भगवान ने आगे बताया — शरीर छोड़ने के बाद जीव एक बहुत सूक्ष्म रूप में रहता है। पुराण इसे यानी अँगूठे जितना छोटा शरीर कहता है। यह आँखों से दिखाई नहीं देता, पर जीव इसी में रहकर अपने आसपास की बातों को महसूस करता है।
पुराण के अनुसार, यमदूत इस सूक्ष्म जीव को थोड़ी देर के लिए यमलोक ले जाते हैं, जहाँ उसे उसके कर्मों की झलक दिखाई जाती है। फिर उसे वापस उसके घर के पास छोड़ दिया जाता है। यहाँ से उसकी असली यात्रा तेरहवें दिन के बाद शुरू होती है।
घर लौटकर जीव अपने परिवार को देखता है। वह अपने शरीर में लौटना चाहता है, पर लौट नहीं पाता। वह अपनों को रोते देखता है और उन्हें पुकारता है, पर कोई सुन नहीं पाता। पुराण कहता है कि इन दिनों जीव को भूख और प्यास का अनुभव होता है, और परिवार का दिया हुआ पिंड और जल ही उसे तृप्त करता है।
इसीलिए परंपरा में कहा गया है कि इन दिनों बहुत ज़्यादा विलाप न करें। माना जाता है कि अपनों के आँसू जाने वाले के मन को बाँधते हैं। दुख होना स्वाभाविक है — रोना गलत नहीं है। पर साथ में प्रार्थना, दीपक और भगवान का नाम भी रखें, ताकि जाने वाले को शांति मिले।
इन दिनों घर में दीपक जलाने, जल का पात्र रखने और गरुड़ पुराण सुनने की परंपरा भी इसी भाव से है। यह सब एक तरह से जाने वाले से कहना है — हम तुम्हें प्रेम करते हैं, तुम शांति से आगे बढ़ो।
आज के जीवन में सीख
दुख में प्रेम को प्रार्थना में बदलना सीखें। अपनों को सबसे अच्छी विदाई शांत मन और भगवान का नाम है।
सभी अध्याय
- 1गरुड़ पुराण क्या है और मृत्यु के बाद क्यों पढ़ा जाता है
- 2गरुड़ जी के प्रश्न
- 3मृत्यु के समय क्या होता है
- 4शरीर छोड़ने के बाद आत्मा
- 5दस दिन का पिंडदान
- 6ग्यारहवाँ, बारहवाँ और तेरहवाँ दिन
- 7यमलोक का मार्ग और वैतरणी नदी
- 8यमराज का दरबार और चित्रगुप्त
- 9कर्म और उसका फल
- 10वे पुण्य कर्म जो साथ जाते हैं
- 11श्राद्ध और पितर
- 12प्रेत योनि और परिवार की सहायता
- 13पुनर्जन्म
- 14मोक्ष का मार्ग
- 15अच्छा जीवन कैसे जियें — गरुड़ पुराण का संदेश