अन्नपूर्णा जी की आरती — अर्थ सहित

माँ अन्नपूर्णा अन्न और पोषण की देवी हैं। उन्होंने स्वयं भगवान शिव को भी अन्न दिया था। भोजन से पहले, रसोई पूजा में और अक्षय तृतीया पर उनकी आरती गाई जाती है।

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जय अन्नपूर्णे माता, मैया जय अन्नपूर्णे। भूखों को अन्न देकर, जग का कष्ट हरने॥

शिव जी को भी अन्न दिया, काशी में आकर। कृपा की माँ ने अपनी, भिक्षा में डाला भर॥

काशी की अधिष्ठात्री, सदा विराजो माँ। रसोई में बसो नित्य, रखो हमारी नाँव॥

अन्न से जीवन चलता, यह तुम्हारी दाया। अन्नपूर्णे की महिमा, जग में सदा छाया॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अन्नपूर्णा जी की आरती कब करें?

भोजन से पहले, रसोई में पूजा के समय, अक्षय तृतीया पर और अन्नपूर्णा जयंती पर उनकी आरती करना शुभ माना जाता है।

माँ अन्नपूर्णा का मंदिर कहाँ है?

माँ अन्नपूर्णा का सबसे प्रसिद्ध मंदिर काशी (वाराणसी) में है। वे काशी की अधिष्ठात्री देवी हैं।

अन्नपूर्णा जयंती कब है?

अन्नपूर्णा जयंती मार्गशीर्ष पूर्णिमा को मनाई जाती है। कुछ परंपराओं में इसे अन्नकूट के दिन भी मनाते हैं।

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