अन्नपूर्णा स्तोत्र — अर्थ सहित

अन्नपूर्णा स्तोत्र आदि शंकराचार्य ने रचा। माँ अन्नपूर्णा काशी (वाराणसी) की प्रमुख देवी हैं जो सभी प्राणियों को अन्न और तृप्ति देती हैं। इस स्तोत्र के अंत में शंकराचार्य माँ से ज्ञान और मोक्ष की भिक्षा माँगते हैं।

8 श्लोक · लगभग 5 मिनट

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी निर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी। प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥१॥

नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी मुक्ताहारविलम्बमानविलसद्वक्षोजकुम्भान्तरी। काश्मीरागरुवासितारुणकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥२॥

योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मैकनिष्ठाकरी चन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी। सर्वैश्वर्यसमस्तवाञ्छितकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥३॥

कैलासाचलकन्दरालयकरी गौरी उमा शङ्करी कौमारी निगमार्थगोचरकरी ओङ्कारबीजाक्षरी। मोक्षद्वारकवाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥४॥

दृश्यादृश्यविभूतिवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरी लीलानाटकसूत्रभेदनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी। श्रीविश्वेशमनःप्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥५॥

उर्वीसर्वजनेश्वरी भगवती माताऽन्नपूर्णेश्वरी वेणीनीलसमानकुन्तलधरी नित्यान्नदानेश्वरी। सर्वानन्दकरी सदाशिवकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥६॥

आदिक्षान्तसमस्तवर्णनकरी शम्भोस्त्रिभावाकरी काश्मीराञ्चलशोभिताकरधरी काशीपुराधीश्वरी। सर्वज्ञानकरी नवीनरुचिरा काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥७॥

देवी सर्वविचित्ररत्नरचिता दाक्षायणी सुन्दरी वामे स्वादुपयोधरा प्रियकरी सौभाग्यमाहेश्वरी। भक्ताभीष्टकरी सदाशुभकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥८॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अन्नपूर्णा स्तोत्र किसने लिखा?

अन्नपूर्णा स्तोत्र आदि शंकराचार्य ने रचा। इसमें 8 श्लोक हैं जिनमें प्रत्येक के अंत में माँ अन्नपूर्णेश्वरी से भिक्षा (ज्ञान और मोक्ष) माँगी गई है।

माँ अन्नपूर्णा का मंदिर कहाँ है?

माँ अन्नपूर्णा का प्रसिद्ध मंदिर काशी (वाराणसी) में विश्वनाथ मंदिर के पास है। यह हिंदुओं का अत्यंत पवित्र तीर्थ है।

अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ कब करें?

भोजन से पूर्व, नवरात्रि में और शुक्रवार को अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ शुभ माना जाता है। इससे घर में अन्न-धन की कमी नहीं होती।

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