जय गणेश जय गणेश देवा — अर्थ सहित

हर शुभ काम की शुरुआत गणेश जी से होती है। बुधवार, गणेश चतुर्थी और हर पूजा की शुरुआत में यह आरती गाई जाती है।

6 पद · लगभग 4 मिनट

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी। माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥

पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया। बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी। कामना को पूर्ण करो, जाऊं बिलहारी॥

'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

इसके बाद पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश जी की आरती पहले क्यों की जाती है?

गणेश जी को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य माना जाता है, इसलिए हर शुभ काम और पूजा उन्हीं से शुरू होती है।

गणेश जी को कौन सा भोग प्रिय है?

मोदक और लड्डू, जैसा आरती में भी कहा गया है।

इस बारे में कुछ पूछें

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार