श्री सूक्तम् — अर्थ सहित

श्री सूक्त देवी लक्ष्मी की सबसे प्राचीन स्तुति है, जो ऋग्वेद के खिल भाग (परिशिष्ट) में मिलती है। इसमें अग्नि देव से प्रार्थना है कि वे सुनहरी आभा वाली लक्ष्मी को हमारे घर लाएँ। दीपावली, शुक्रवार और लक्ष्मी पूजा में इसका पाठ विशेष माना जाता है।

16 मंत्र · लगभग 6 मिनट

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥१॥

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्। यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥२॥

अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम्। श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम्॥३॥

कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्। पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥४॥

चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्। तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥५॥

आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः। तस्य फलानि तपसा नुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः॥६॥

उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह। प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥७॥

क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्। अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्॥८॥

गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्। ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्॥९॥

मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि। पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः॥१०॥

कर्दमेन प्रजा भूता मयि सम्भव कर्दम। श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्॥११॥

आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे। नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले॥१२॥

आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥१३॥

आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्। सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥१४॥

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्। यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम्॥१५॥

यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्। सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥१६॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री सूक्त का पाठ कब करें?

शुक्रवार, पूर्णिमा, दीपावली और लक्ष्मी पूजा के दिन इसका पाठ विशेष माना जाता है। रोज़ सुबह या शाम दीपक जलाकर भी पढ़ सकते हैं।

श्री सूक्त का पाठ कैसे करें?

स्नान के बाद लक्ष्मी जी के सामने घी का दीपक जलाएँ, कमल या लाल फूल चढ़ाएँ और शांत मन से सभी मंत्र पढ़ें। अंतिम मंत्र में रोज़ जप और घी की आहुति की बात कही गई है, इसलिए कई लोग हवन के साथ भी इसका पाठ करते हैं।

श्री सूक्त किस वेद से है?

यह ऋग्वेद के खिल सूक्तों (परिशिष्ट भाग) में आता है, जो पाँचवें मंडल के बाद जुड़ा है। इसे लक्ष्मी की सबसे पुरानी स्तुति माना जाता है।

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